श्रुतधारा
॥ श्री ॥

जीवतत्त्वप्रदीपिका

jivatattvapradipikaa

आ. नेमिचन्द्र · १०वीं शती · अभिलेख ५३/९०

श्री प्रभाचन्द्राचार्य-1आ. नेमिचन्द्रश्री भानुनन्दिस्वामी

संक्षिप्त परिचय

गोम्मटसार की प्रतिष्ठित टीका-परम्परा का ग्रन्थ — जीव-तत्त्व के गहन सिद्धान्त को दीपक की भाँति प्रकाशित करने वाली व्याख्या।

— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.

अभिलेख-विवरण

जीवतत्त्वप्रदीपिका — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ५३ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता आ. नेमिचन्द्र; रचना-काल १०वीं शती (लगभग)। आचार्य-समयानुक्रमणिका (क्रमांक ९४) के अनुसार इनका समय ५५६–५६५ है तथा गुरु श्री प्रभाचन्द्राचार्य-१। इसी लेखनी से गोम्मटसार जीवकाण्ड, गोम्मटसार कर्मकाण्ड, द्रव्यसंग्रह, लब्धिसार, क्षपणासार, त्रिलोकसार भी इस सूची में सम्मिलित हैं। समकालीन ग्रन्थों में चन्द्रप्रभचरित, प्रद्युम्नचरित, गद्यचिन्तामणि, क्षत्रचूड़ामणि, यशस्तिलकचम्पू, नीतिवाक्यामृत परिगणित हैं।

जीवतत्त्वप्रदीपिका (jivatattvapradipikaa) is entry 53 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by आ. नेमिचन्द्र around the 10th century CE. The acharya chronology (entry 94) places the author in 556–565, disciple of श्री प्रभाचन्द्राचार्य-1. From the same pen: गोम्मटसार जीवकाण्ड, गोम्मटसार कर्मकाण्ड, द्रव्यसंग्रह, लब्धिसार, क्षपणासार, त्रिलोकसार. Contemporary works include चन्द्रप्रभचरित, प्रद्युम्नचरित, गद्यचिन्तामणि, क्षत्रचूड़ामणि, यशस्तिलकचम्पू, नीतिवाक्यामृत.

गोम्मटसार जीवकाण्डगोम्मटसार कर्मकाण्डद्रव्यसंग्रहलब्धिसारक्षपणासारत्रिलोकसार
चन्द्रप्रभचरितप्रद्युम्नचरितगद्यचिन्तामणिक्षत्रचूड़ामणियशस्तिलकचम्पूनीतिवाक्यामृत
सम्पूर्ण ग्रन्थ पढ़ें

बाह्य ग्रन्थालयों में खोज — नई टैब में खुलेगी

पीडीएफ़ डाउनलोड

प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ५३ — मूल छायाचित्र