परिचय
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स्रोत एवं श्रेय
भावत्रयफलप्रदर्शी
आचार्यवर्य कुन्थुसागर जी की परम्पराआचार्य समयानुक्रमणिका (४२० आचार्य) एवं १७२ भट्टारक-विद्वानों का परिचय इसी ग्रन्थ के पृष्ठ ६–२९ से अक्षरशः लिया गया है। मूल छायाचित्र यहाँ उपलब्ध हैं — हर पंक्ति का प्रमाण।
९० ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची
मुमुक्षु (Mumukshu) पोस्टरदिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थ — ग्रन्थ, रचयिता, रचना-काल। “दिगम्बर जैन आचार्यों के अमूल्य ग्रन्थ हमारी धरोहर हैं; इनका अध्ययन और स्वाध्याय ही आत्मकल्याण का मार्ग है।”
पद्धति
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ग्रन्थ-पृष्ठों पर संक्षिप्त परिचय सम्पादकीय सामान्य-परिचय हैं (स्रोत-सूचियों से इतर), जबकि अभिलेख-विवरण केवल इन्हीं सूचियों के आँकड़ों से स्वतः रचा जाता है — दोनों स्पष्ट रूप से पृथक् रखे गये हैं। भाषा-चयनक (हिं / EN / सं / प्रा) साइट का कलेवर हिन्दी, English, संस्कृत और प्राकृत में बदलता है; सूची-सामग्री सदा मूल देवनागरी में रहती है।