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नीतिवाक्यामृत
nitivaakyaamrita
संक्षिप्त परिचय
आचार्य सोमदेव कृत — राजा और राज्य-संचालन पर सूत्र-शैली का नीतिशास्त्र; अर्थशास्त्र-परम्परा में जैन दृष्टि का अनूठा योगदान।
— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.
अभिलेख-विवरण
नीतिवाक्यामृत — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ४६ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता आ. सोमदेव; रचना-काल १०वीं शती (लगभग)। आचार्य-समयानुक्रमणिका (क्रमांक १८८) के अनुसार इनका समय ९४३–९६८ है तथा गुरु श्री नेमिदेव। वहाँ इनकी विशेषता/प्रधान कृति के रूप में "नीतिवाक्यामृतादि" उल्लिखित है। इसी लेखनी से यशस्तिलकचम्पू भी इस सूची में सम्मिलित है। समकालीन ग्रन्थों में चन्द्रप्रभचरित, प्रद्युम्नचरित, गद्यचिन्तामणि, क्षत्रचूड़ामणि, गोम्मटसार जीवकाण्ड, गोम्मटसार कर्मकाण्ड परिगणित हैं।
नीतिवाक्यामृत (nitivaakyaamrita) is entry 46 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by आ. सोमदेव around the 10th century CE. The acharya chronology (entry 188) places the author in 943–968, disciple of श्री नेमिदेव, and credits him with "नीतिवाक्यामृतादि". From the same pen: यशस्तिलकचम्पू. Contemporary works include चन्द्रप्रभचरित, प्रद्युम्नचरित, गद्यचिन्तामणि, क्षत्रचूड़ामणि, गोम्मटसार जीवकाण्ड, गोम्मटसार कर्मकाण्ड.
प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ४६ — मूल छायाचित्र