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प्रद्युम्नचरित
pradyumnacharita
संक्षिप्त परिचय
आचार्य महासेन कृत — श्रीकृष्ण-पुत्र प्रद्युम्न के पूर्वभव और विद्याधर-हरण की रोमांचक कथा का जैन काव्य।
— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.
अभिलेख-विवरण
प्रद्युम्नचरित — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ४२ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता आ. महासेन; रचना-काल १०वीं शती (लगभग)। आचार्य-समयानुक्रमणिका (क्रमांक १४७) के अनुसार इनका समय ई.श. ८–९ है तथा गुरु श्री चन्द्रनन्दि। वहाँ इनकी विशेषता/प्रधान कृति के रूप में "सुलोचना कथा" उल्लिखित है। समकालीन ग्रन्थों में चन्द्रप्रभचरित, गद्यचिन्तामणि, क्षत्रचूड़ामणि, यशस्तिलकचम्पू, नीतिवाक्यामृत, गोम्मटसार जीवकाण्ड परिगणित हैं।
प्रद्युम्नचरित (pradyumnacharita) is entry 42 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by आ. महासेन around the 10th century CE. The acharya chronology (entry 147) places the author in ई.श. 8–9, disciple of श्री चन्द्रनन्दि, and credits him with "सुलोचना कथा". Contemporary works include चन्द्रप्रभचरित, गद्यचिन्तामणि, क्षत्रचूड़ामणि, यशस्तिलकचम्पू, नीतिवाक्यामृत, गोम्मटसार जीवकाण्ड.
प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ४२ — मूल छायाचित्र