श्रुतधारा
॥ श्री ॥

पार्श्वपुराण

paarshvapuraana

पद्मकीर्ति · १०वीं शती · अभिलेख ७८/९०

श्री जिनसेनपद्मकीर्ति

संक्षिप्त परिचय

कवि पद्मकीर्ति कृत — तेईसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का चरित; अपभ्रंश 'पासणाहचरिउ' के रूप में प्रसिद्ध रचना।

— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.

अभिलेख-विवरण

पार्श्वपुराण — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ७८ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता पद्मकीर्ति; रचना-काल १०वीं शती (लगभग)। आचार्य-समयानुक्रमणिका (क्रमांक २५७) के अनुसार इनका समय १०७७ है तथा गुरु श्री जिनसेन। वहाँ इनकी विशेषता/प्रधान कृति के रूप में "पासणाह चरिउ" उल्लिखित है। समकालीन ग्रन्थों में चन्द्रप्रभचरित, प्रद्युम्नचरित, गद्यचिन्तामणि, क्षत्रचूड़ामणि, यशस्तिलकचम्पू, नीतिवाक्यामृत परिगणित हैं।

पार्श्वपुराण (paarshvapuraana) is entry 78 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by पद्मकीर्ति around the 10th century CE. The acharya chronology (entry 257) places the author in 1077, disciple of श्री जिनसेन, and credits him with "पासणाह चरिउ". Contemporary works include चन्द्रप्रभचरित, प्रद्युम्नचरित, गद्यचिन्तामणि, क्षत्रचूड़ामणि, यशस्तिलकचम्पू, नीतिवाक्यामृत.

चन्द्रप्रभचरितप्रद्युम्नचरितगद्यचिन्तामणिक्षत्रचूड़ामणियशस्तिलकचम्पूनीतिवाक्यामृत
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प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ७८ — मूल छायाचित्र