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शांतिपुराण
shaantipuraana
संक्षिप्त परिचय
भगवान शान्तिनाथ की पुराण-कथा की परम्परा का मध्यकालीन ग्रन्थ।
— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.
अभिलेख-विवरण
शांतिपुराण — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ७९ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता पन्नालाल; रचना-काल मध्यकाल (लगभग)। आचार्य-समयानुक्रमणिका (क्रमांक १४९) के अनुसार इनका समय १७७०–१८४० है। वहाँ इनकी विशेषता/प्रधान कृति के रूप में "राजवार्तिक वचनिका" उल्लिखित है। समकालीन ग्रन्थों में भुजबलिचरित, भक्ति-संग्रह, पंचसंग्रह, तत्त्वदीपिका परिगणित हैं।
शांतिपुराण (shaantipuraana) is entry 79 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by पन्नालाल around the medieval period. The acharya chronology (entry 149) places the author in 1770–1840, and credits him with "राजवार्तिक वचनिका". Contemporary works include भुजबलिचरित, भक्ति-संग्रह, पंचसंग्रह, तत्त्वदीपिका.
प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ७९ — मूल छायाचित्र