श्रुतधारा
॥ श्री ॥

मूलाचार

mulaachaara

आ. वट्टकेर · २–३वीं शती · अभिलेख ९/९०

आ. वट्टकेर

संक्षिप्त परिचय

आचार्य वट्टकेर कृत — दिगम्बर मुनि के मूलगुण, समाचार, पिण्डशुद्धि आदि का विस्तृत प्राकृत ग्रन्थ।

मुनि-आचार का प्रधान आकर होने से इसे दिगम्बर परम्परा का 'आचारांग' भी कहा जाता है।

— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.

अभिलेख-विवरण

मूलाचार — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ९ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता आ. वट्टकेर; रचना-काल २–३वीं शती (लगभग)। आचार्य-समयानुक्रमणिका (क्रमांक ६६) के अनुसार इनका समय १२७–१७९ है। वहाँ इनकी विशेषता/प्रधान कृति के रूप में "मूलाचार" उल्लिखित है। समकालीन ग्रन्थों में षट्खण्डागम, कसायपाहुड, समयसार, प्रवचनसार, पंचास्तिकाय, नियमसार परिगणित हैं।

मूलाचार (mulaachaara) is entry 9 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by आ. वट्टकेर around the 2nd–3rd century CE. The acharya chronology (entry 66) places the author in 127–179, and credits him with "मूलाचार". Contemporary works include षट्खण्डागम, कसायपाहुड, समयसार, प्रवचनसार, पंचास्तिकाय, नियमसार.

षट्खण्डागमकसायपाहुडसमयसारप्रवचनसारपंचास्तिकायनियमसार
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प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ९ — मूल छायाचित्र