श्रुतधारा
॥ श्री ॥

धर्मामृत

dharmaamrita

आशाधर · १३वीं शती · अभिलेख ६८/९०

आशाधर

संक्षिप्त परिचय

पं. आशाधर का महाग्रन्थ — सागार (गृहस्थ) और अनगार (मुनि) दोनों धर्मों का 'अमृत' एक ही संहिता में; स्वोपज्ञ टीकाओं सहित।

— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.

अभिलेख-विवरण

धर्मामृत — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ६८ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता आशाधर; रचना-काल १३वीं शती (लगभग)। इसी लेखनी से सागरधर्मामृत, अनगारधर्मामृत, श्रावकाचार, महाभिषेक, जिनयज्ञकल्प भी इस सूची में सम्मिलित हैं।

धर्मामृत (dharmaamrita) is entry 68 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by आशाधर around the 13th century CE. From the same pen: सागरधर्मामृत, अनगारधर्मामृत, श्रावकाचार, महाभिषेक, जिनयज्ञकल्प.

सागरधर्मामृतअनगारधर्मामृतश्रावकाचारमहाभिषेकजिनयज्ञकल्प
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प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ६८ — मूल छायाचित्र