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पद्मपुराण
padmapuraana
संक्षिप्त परिचय
आचार्य रविषेण कृत संस्कृत महाकाव्य — राम (पद्म) कथा का जैन निरूपण; रावण विद्याधर-वंशी मानव के रूप में — यही 'जैन रामायण' की प्रधान परम्परा बनी।
— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.
अभिलेख-विवरण
पद्मपुराण — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ६९ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता रविषेण; रचना-काल ७वीं शती (लगभग)। आचार्य-समयानुक्रमणिका (क्रमांक ११६) के अनुसार इनका समय ६७७ है तथा गुरु श्री लक्ष्मणसेन। वहाँ इनकी विशेषता/प्रधान कृति के रूप में "श्री पद्मपुराणजी" उल्लिखित है। समकालीन ग्रन्थों में वरांगचरित परिगणित हैं।
पद्मपुराण (padmapuraana) is entry 69 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by रविषेण around the 7th century CE. The acharya chronology (entry 116) places the author in 677, disciple of श्री लक्ष्मणसेन, and credits him with "श्री पद्मपुराणजी". Contemporary works include वरांगचरित.
प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ६९ — मूल छायाचित्र