श्रुतधारा
॥ श्री ॥

जिनयज्ञकल्प

jinayajnakalpa

आशाधर · १३वीं शती · अभिलेख ६७/९०

आशाधर

संक्षिप्त परिचय

पं. आशाधर कृत — जिन-पूजा एवं प्रतिष्ठा-विधानों का कल्प (विधि-संहिता); प्रतिष्ठा-पाठ परम्परा में प्रमाण-रूप से प्रयुक्त।

— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.

अभिलेख-विवरण

जिनयज्ञकल्प — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ६७ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता आशाधर; रचना-काल १३वीं शती (लगभग)। इसी लेखनी से सागरधर्मामृत, अनगारधर्मामृत, श्रावकाचार, महाभिषेक, धर्मामृत भी इस सूची में सम्मिलित हैं।

जिनयज्ञकल्प (jinayajnakalpa) is entry 67 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by आशाधर around the 13th century CE. From the same pen: सागरधर्मामृत, अनगारधर्मामृत, श्रावकाचार, महाभिषेक, धर्मामृत.

सागरधर्मामृतअनगारधर्मामृतश्रावकाचारमहाभिषेकधर्मामृत
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प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ६७ — मूल छायाचित्र