श्रुतधारा
॥ श्री ॥

चामुण्डरायपुराण

chaamundaraayapuraana

चामुण्डराय · १०वीं शती · अभिलेख ७२/९०

श्री अजितसेनचामुण्डराय

संक्षिप्त परिचय

गोम्मटेश्वर-प्रतिष्ठापक सेनापति चामुण्डराय कृत — त्रिषष्टि शलाका-पुरुषों का चरित; कन्नड़ गद्य के प्राचीनतम उपलब्ध स्मारकों में परिगणित।

— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.

अभिलेख-विवरण

चामुण्डरायपुराण — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ७२ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता चामुण्डराय; रचना-काल १०वीं शती (लगभग)। आचार्य-समयानुक्रमणिका (क्रमांक २१०) के अनुसार इनका समय ९७८ है तथा गुरु श्री अजितसेन। वहाँ इनकी विशेषता/प्रधान कृति के रूप में "चारित्रसार" उल्लिखित है। समकालीन ग्रन्थों में चन्द्रप्रभचरित, प्रद्युम्नचरित, गद्यचिन्तामणि, क्षत्रचूड़ामणि, यशस्तिलकचम्पू, नीतिवाक्यामृत परिगणित हैं।

चामुण्डरायपुराण (chaamundaraayapuraana) is entry 72 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by चामुण्डराय around the 10th century CE. The acharya chronology (entry 210) places the author in 978, disciple of श्री अजितसेन, and credits him with "चारित्रसार". Contemporary works include चन्द्रप्रभचरित, प्रद्युम्नचरित, गद्यचिन्तामणि, क्षत्रचूड़ामणि, यशस्तिलकचम्पू, नीतिवाक्यामृत.

चन्द्रप्रभचरितप्रद्युम्नचरितगद्यचिन्तामणिक्षत्रचूड़ामणियशस्तिलकचम्पूनीतिवाक्यामृत
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प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ७२ — मूल छायाचित्र