बाह्य ग्रन्थालयों में खोज — नई टैब में खुलेगी
आदिपुराण
aadipuraana
संक्षिप्त परिचय
आचार्य जिनसेन कृत संस्कृत महाकाव्य — प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव तथा भरत-बाहुबली का चरित; संस्कृति, राजनीति, संस्कार-विधि — सबका विश्वकोशीय चित्रण।
आचार्य के स्वर्गवास से अपूर्ण रहा; शिष्य गुणभद्र ने उत्तरपुराण से इसे पूर्ण किया — दोनों मिलकर 'महापुराण' कहलाते हैं।
— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.
अभिलेख-विवरण
आदिपुराण — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ३३ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता आ. जिनसेन; रचना-काल ९वीं शती (लगभग)। आचार्य-समयानुक्रमणिका (क्रमांक १३४) के अनुसार इनका समय ७४८–८१८ है। वहाँ इनकी विशेषता/प्रधान कृति के रूप में "हरिवंशपुराण" उल्लिखित है। इसी लेखनी से हरिवंशपुराण भी इस सूची में सम्मिलित है। समकालीन ग्रन्थों में महापुराण (उत्तरपुराण), धवला, जयधवला, महाधवला, आदिपुराण (संस्कृत पूर्ति), वर्धमानचरित्र परिगणित हैं।
आदिपुराण (aadipuraana) is entry 33 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by आ. जिनसेन around the 9th century CE. The acharya chronology (entry 134) places the author in 748–818, and credits him with "हरिवंशपुराण". From the same pen: हरिवंशपुराण. Contemporary works include महापुराण (उत्तरपुराण), धवला, जयधवला, महाधवला, आदिपुराण (संस्कृत पूर्ति), वर्धमानचरित्र.
प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ३३ — मूल छायाचित्र