श्रुतधारा
॥ श्री ॥

आदिपुराण (संस्कृत पूर्ति)

aadipuraana (sanskrita purti)

आ. गुणभद्र · ९वीं शती · अभिलेख ३८/९०

श्री जिनसेन-3आ. गुणभद्रश्री लोकसेनाचार्य

संक्षिप्त परिचय

गुरु जिनसेन के देहावसान से अपूर्ण रहे आदिपुराण की आचार्य गुणभद्र द्वारा की गई संस्कृत पूर्ति — गुरु-शिष्य की लेखनी का अखण्ड सेतु।

— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.

अभिलेख-विवरण

आदिपुराण (संस्कृत पूर्ति) — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ३८ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता आ. गुणभद्र; रचना-काल ९वीं शती (लगभग)। आचार्य-समयानुक्रमणिका (क्रमांक १६४) के अनुसार इनका समय ८९८ है तथा गुरु श्री जिनसेन-३। वहाँ इनकी विशेषता/प्रधान कृति के रूप में "उत्तरपुराण" उल्लिखित है। इसी लेखनी से महापुराण (उत्तरपुराण), उत्तरपुराण भी इस सूची में सम्मिलित हैं। समकालीन ग्रन्थों में आदिपुराण, धवला, जयधवला, महाधवला, वर्धमानचरित्र, शांतिनाथपुराण परिगणित हैं।

आदिपुराण (संस्कृत पूर्ति) (aadipuraana (sanskrita purti)) is entry 38 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by आ. गुणभद्र around the 9th century CE. The acharya chronology (entry 164) places the author in 898, disciple of श्री जिनसेन-3, and credits him with "उत्तरपुराण". From the same pen: महापुराण (उत्तरपुराण), उत्तरपुराण. Contemporary works include आदिपुराण, धवला, जयधवला, महाधवला, वर्धमानचरित्र, शांतिनाथपुराण.

महापुराण (उत्तरपुराण)उत्तरपुराण
आदिपुराणधवलाजयधवलामहाधवलावर्धमानचरित्रशांतिनाथपुराण
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प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ३८ — मूल छायाचित्र