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वर्धमानचरित्र
vardhamaanacharitra
संक्षिप्त परिचय
आचार्य असग कृत संस्कृत काव्य — अन्तिम तीर्थंकर भगवान महावीर (वर्धमान) के पूर्वभवों सहित चरित का काव्यमय निरूपण।
— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.
अभिलेख-विवरण
वर्धमानचरित्र — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ३९ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता आ. असग; रचना-काल ९वीं शती (लगभग)। आचार्य-समयानुक्रमणिका (क्रमांक २१५) के अनुसार इनका समय ९८८ है तथा गुरु श्री नागनन्दि। वहाँ इनकी विशेषता/प्रधान कृति के रूप में "वर्द्धमान चरित्र" उल्लिखित है। इसी लेखनी से शांतिनाथपुराण, वर्धमानचरित भी इस सूची में सम्मिलित हैं। समकालीन ग्रन्थों में आदिपुराण, महापुराण (उत्तरपुराण), धवला, जयधवला, महाधवला, आदिपुराण (संस्कृत पूर्ति) परिगणित हैं।
वर्धमानचरित्र (vardhamaanacharitra) is entry 39 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by आ. असग around the 9th century CE. The acharya chronology (entry 215) places the author in 988, disciple of श्री नागनन्दि, and credits him with "वर्द्धमान चरित्र". From the same pen: शांतिनाथपुराण, वर्धमानचरित. Contemporary works include आदिपुराण, महापुराण (उत्तरपुराण), धवला, जयधवला, महाधवला, आदिपुराण (संस्कृत पूर्ति).
प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ३९ — मूल छायाचित्र