श्रुतधारा
॥ श्री ॥

भक्ति-संग्रह

bhakti-sangraha

विभिन्न आचार्य · मध्यकाल · अभिलेख ८४/९०

विभिन्न आचार्य

संक्षिप्त परिचय

सिद्धभक्ति, श्रुतभक्ति, चारित्रभक्ति आदि भक्तियों का संग्रह — कुन्दकुन्द-पूज्यपाद परम्परा से चली आती प्राकृत-संस्कृत भक्ति-पाठ की धारा, जो आज भी मुनि-चर्या में नित्य प्रयुक्त है।

— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.

अभिलेख-विवरण

भक्ति-संग्रह — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ८४ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता विभिन्न आचार्य; रचना-काल मध्यकाल (लगभग)। इसी लेखनी से भुजबलिचरित, पंचसंग्रह, तत्त्वदीपिका भी इस सूची में सम्मिलित हैं। समकालीन ग्रन्थों में शांतिपुराण परिगणित हैं।

भक्ति-संग्रह (bhakti-sangraha) is entry 84 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by विभिन्न आचार्य around the medieval period. From the same pen: भुजबलिचरित, पंचसंग्रह, तत्त्वदीपिका. Contemporary works include शांतिपुराण.

भुजबलिचरितपंचसंग्रहतत्त्वदीपिका
शांतिपुराण
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प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ८४ — मूल छायाचित्र