श्रुतधारा
॥ श्री ॥

पंचसंग्रह

panchasangraha

विभिन्न · मध्यकाल · अभिलेख ८५/९०

विभिन्न

संक्षिप्त परिचय

जीवसमास, प्रकृति-समुत्कीर्तन आदि पाँच सैद्धान्तिक प्रकरणों का संग्रह — कर्म-सिद्धान्त के अध्ययन की प्राचीन पाठ्य-योजना।

— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.

अभिलेख-विवरण

पंचसंग्रह — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ८५ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता विभिन्न; रचना-काल मध्यकाल (लगभग)। इसी लेखनी से भुजबलिचरित, भक्ति-संग्रह, तत्त्वदीपिका भी इस सूची में सम्मिलित हैं। समकालीन ग्रन्थों में शांतिपुराण परिगणित हैं।

पंचसंग्रह (panchasangraha) is entry 85 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by विभिन्न around the medieval period. From the same pen: भुजबलिचरित, भक्ति-संग्रह, तत्त्वदीपिका. Contemporary works include शांतिपुराण.

भुजबलिचरितभक्ति-संग्रहतत्त्वदीपिका
शांतिपुराण
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प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ८५ — मूल छायाचित्र