श्रुतधारा
॥ श्री ॥

भद्रबाहुचरित

bhadrabaahucharita

रत्ननन्दि · १५वीं शती · अभिलेख ८१/९०

श्री शुभनन्दि के सधर्मीरत्ननन्दिश्री माणिक्यनन्दि-1

संक्षिप्त परिचय

कवि रत्ननन्दि कृत — अन्तिम श्रुतकेवली भद्रबाहु स्वामी का चरित; सम्राट चन्द्रगुप्त के दीक्षा-प्रसंग और दक्षिण-प्रवास की ऐतिहासिक कथा।

— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.

अभिलेख-विवरण

भद्रबाहुचरित — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ८१ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता रत्ननन्दि; रचना-काल १५वीं शती (लगभग)। आचार्य-समयानुक्रमणिका (क्रमांक ४०) के अनुसार इनका समय मध्यपाद है तथा गुरु श्री शुभनन्दि के सधर्मी।

भद्रबाहुचरित (bhadrabaahucharita) is entry 81 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by रत्ननन्दि around the 15th century CE. The acharya chronology (entry 40) places the author in मध्यपाद, disciple of श्री शुभनन्दि के सधर्मी.

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प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ८१ — मूल छायाचित्र