श्रुतधारा
॥ श्री ॥

रहस्यपूर्ण चिट्ठी

rahasyapurna chitthi

पं. टोडरमल · १८वीं शती · अभिलेख ८८/९०

पं. टोडरमल

संक्षिप्त परिचय

पं. टोडरमलजी द्वारा मुल्तान के जिज्ञासु साधर्मियों को लिखा गया आध्यात्मिक पत्र — कुछ ही पृष्ठों में द्रव्यदृष्टि का सम्पूर्ण रहस्य; 'गागर में सागर' की उक्ति इस पर चरितार्थ होती है।

— सम्पादकीय परिचय; नीचे की तालिका-सामग्री मूल स्रोतों से अक्षरशः है। · Editorial summary; all list data is verbatim from the sources.

अभिलेख-विवरण

रहस्यपूर्ण चिट्ठी — दिगम्बर जैन सम्प्रदाय के ९० प्रमुख प्राचीन ग्रन्थों की कालानुक्रमिक सूची में क्रमांक ८८ पर अंकित ग्रन्थ है। रचयिता पं. टोडरमल; रचना-काल १८वीं शती (लगभग)। इसी लेखनी से मोक्षमार्गप्रकाशक भी इस सूची में सम्मिलित है। समकालीन ग्रन्थों में गोम्मटसार पूजा-टीका परिगणित हैं।

रहस्यपूर्ण चिट्ठी (rahasyapurna chitthi) is entry 88 in the chronological list of the 90 principal ancient granths of the Digambar Jain tradition, composed by पं. टोडरमल around the 18th century CE. From the same pen: मोक्षमार्गप्रकाशक. Contemporary works include गोम्मटसार पूजा-टीका.

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प्रमाण: ९०-ग्रन्थ सूची-पोस्टर, पंक्ति ८८ — मूल छायाचित्र