॥ श्री ॥
अष्टपाहुड
दर्शन-पाहुड
काऊण णमुक्कारं जिणवरवसहस्स वड्ढमाणस्स
दंसणमग्गं वोच्छामि जहाकमं समासेण ॥1॥
दंसणमग्गं वोच्छामि जहाकमं समासेण ॥1॥
दंसणमूलो धम्मो उवइट्ठो जिणवरेहिं सिस्साणं ।
तं सोऊण सकण्णे दंसणहीणो ण वंदिव्वो ॥2॥
तं सोऊण सकण्णे दंसणहीणो ण वंदिव्वो ॥2॥
दंसणभट्ठा भट्ठा दंसणभट्ठस्स णत्थि णिव्वाणं
सिज्झंति चरियभट्ठा दंसणभट्ठा ण सिज्झंति ॥3॥
सिज्झंति चरियभट्ठा दंसणभट्ठा ण सिज्झंति ॥3॥
सम्मत्तरयणभट्ठा जाणंता बहुविहाइं सत्थाइं
आराहणाविरहिया भमंति तत्थेव तत्थेव ॥4॥
आराहणाविरहिया भमंति तत्थेव तत्थेव ॥4॥
सम्मत्तविरहिया णं सुठ्ठू वि उग्गं तवं चरंता णं
ण लहंति बोहिलाहं अवि वाससहस्सकोडीहिं ॥5॥
ण लहंति बोहिलाहं अवि वाससहस्सकोडीहिं ॥5॥
सम्मत्तणाणदंसणबलवीरियवड्ढमाण जे सव्वे
कलिकलुसपावरहिया वरणाणी होंति अइरेण ॥6॥
कलिकलुसपावरहिया वरणाणी होंति अइरेण ॥6॥
सम्मत्तसलिलपवहो णिच्चं हियए पवट्ठए जस्स
कम्मं वालुयवरणं बन्धुच्चिय णासए तस्स ॥7॥
कम्मं वालुयवरणं बन्धुच्चिय णासए तस्स ॥7॥
जे दंसणेसु भट्ठा णाणे भट्ठा चरित्तभट्ठा य
एदे भट्ठ वि भट्ठा सेसं पि जणं विणासंति ॥8॥
एदे भट्ठ वि भट्ठा सेसं पि जणं विणासंति ॥8॥
जो कोवि धम्मसीलो संजमतवणियमजोगगुणधारी
तस्स य दोस कहंता भग्गा भग्गत्तणं दिति ॥9॥
तस्स य दोस कहंता भग्गा भग्गत्तणं दिति ॥9॥
जह मूलम्मि विणट्ठे दुमस्स परिवार णत्थि परवड्ढी
तह जिणदंसणभट्ठा मूलविणट्ठा ण सिज्झंति ॥10॥
तह जिणदंसणभट्ठा मूलविणट्ठा ण सिज्झंति ॥10॥
जह मूलाओ खंधो साहापरिवार बहुगुणो होइ
तह जिणदंसण मूलो णिद्दिट्ठो मोक्खमग्गस्स ॥11॥
तह जिणदंसण मूलो णिद्दिट्ठो मोक्खमग्गस्स ॥11॥
जे दंसणेसु भट्ठा पाए पाडंति दंसणधराणं
ते होंति लल्लमूआ बोही पुण दुल्लहा तेसिं ॥12॥
ते होंति लल्लमूआ बोही पुण दुल्लहा तेसिं ॥12॥
जे वि पडंति य तेसिं जाणंता लज्जगारवभयेण
तेसिं पि णत्थि बोही पावं अणुमोयमाणाणं ॥13॥
तेसिं पि णत्थि बोही पावं अणुमोयमाणाणं ॥13॥
दुविंह पि गंथचायं तीसु वि जोएसु संजमो ठादि
णाणम्मि करणसुद्धे उब्भसणे दंसणं होदि ॥14॥
णाणम्मि करणसुद्धे उब्भसणे दंसणं होदि ॥14॥
सम्मत्तदो णाणं णाणादो सव्वभावउवलद्धी
उवलद्धपयत्थे पुण सेयासेयं वियाणेदि ॥15॥
उवलद्धपयत्थे पुण सेयासेयं वियाणेदि ॥15॥
सेयासेयविदण्हू उद्धुददुस्सील सीलवंतो वि
सीलफलेणब्भुदयं तत्ते पुण लहइ णिव्वाणं ॥16॥
सीलफलेणब्भुदयं तत्ते पुण लहइ णिव्वाणं ॥16॥
जिणवयणमोसहमिणं विसयसुहविरेयणं अमिदभूदं
जरमरणवाहिहरणं खयकरणं सव्वदुक्खाणं ॥17॥
जरमरणवाहिहरणं खयकरणं सव्वदुक्खाणं ॥17॥
एगं जिणस्स रूवं बिदियं उक्किट्ठसावयाणं तु
अवरट्ठियाण तइयं चउत्थ पुण लिंगदंसणं णत्थि ॥18॥
अवरट्ठियाण तइयं चउत्थ पुण लिंगदंसणं णत्थि ॥18॥
छह दव्व णव पयत्था पंचत्थी सत्त तच्च णिद्दिट्ठा
सद्दहइ ताण रूवं सो सद्दिट्ठी मुणेयव्वो ॥19॥
सद्दहइ ताण रूवं सो सद्दिट्ठी मुणेयव्वो ॥19॥
जीवादीसद्दहणं सम्मत्तं जिणवरेहिं पण्णत्तं
ववहारा णिच्छयदो अप्पाणं हवइ सम्मत्तं ॥20॥
ववहारा णिच्छयदो अप्पाणं हवइ सम्मत्तं ॥20॥
एवं जिणपण्णत्तं दंसणरयणं धरेह भावेण
सारं गुणरयणत्तय सोवाणं पढम मोक्खस्स ॥21॥
सारं गुणरयणत्तय सोवाणं पढम मोक्खस्स ॥21॥
जं सक्कइ तं कीरइ जं च ण सक्केइ तं च सद्दहणं
केवलिजिणेहिं भणियं सद्दमाणस्स सम्मत्तं ॥22॥
केवलिजिणेहिं भणियं सद्दमाणस्स सम्मत्तं ॥22॥
दंसणणाणचरित्ते तवविणये णिच्चकालसुपसत्था
एदे दु वंदणीया जे गुणवादी गुणधराणं ॥23॥
एदे दु वंदणीया जे गुणवादी गुणधराणं ॥23॥
सहजुप्पण्णं रूवं दट्ठं जो मण्णए ण मच्छरिओ
सो संजमपडिवण्णो मिच्छाइट्ठी हवइ एसो ॥24॥
सो संजमपडिवण्णो मिच्छाइट्ठी हवइ एसो ॥24॥
अमराण वंदियाणं रूवं दट्ठूण सीलसहियाणं
जे गारवं करंति य सम्मत्तविवज्जिया होंति ॥25॥
जे गारवं करंति य सम्मत्तविवज्जिया होंति ॥25॥
अस्संजदं ण वन्दे वत्थविहीणोवि तो ण वंदिज्ज
दोण्णि वि होंति समाणा एगो वि ण संजदो होदि ॥26॥
दोण्णि वि होंति समाणा एगो वि ण संजदो होदि ॥26॥
ण वि देहो वंदिज्जइ ण वि य कुलो ण वि य जाइसंजुतो
को वंदमि गुणहीणो ण हु सवणो णेय सावओ होइ ॥27॥
को वंदमि गुणहीणो ण हु सवणो णेय सावओ होइ ॥27॥
वंदमि तवसावण्णा सीलं च गुणं च बंभचेरं च
सिद्धिगमणं च तेसिं सम्मत्तेण3 सुद्धभावेण ॥28॥
सिद्धिगमणं च तेसिं सम्मत्तेण3 सुद्धभावेण ॥28॥
चउसट्ठि चमरसहिओ चउतीसहि अइसएहिं संजुत्ते
अणवरबहुसत्तहिओ कम्मक्खयकारणणिमित्ते ॥29॥
अणवरबहुसत्तहिओ कम्मक्खयकारणणिमित्ते ॥29॥
णाणेण दंसणेण य तवेण चरियेण संजमगुणेण
चउहिं पि समाजोगे मोक्खो जिणसासणे दिट्ठो ॥30॥
चउहिं पि समाजोगे मोक्खो जिणसासणे दिट्ठो ॥30॥
णाणं णरस्स सारो सारो वि णरस्स होइ सम्मत्तं
सम्मत्तओ चरणं चरणाओ होइ णिव्वाणं ॥31॥
सम्मत्तओ चरणं चरणाओ होइ णिव्वाणं ॥31॥
णाणम्मि दंसणम्मि य तवेण चरिएण सम्मसहिएण
चउण्हं पि समाजोगे सिद्धा जीवा ण सन्देहो ॥32॥
चउण्हं पि समाजोगे सिद्धा जीवा ण सन्देहो ॥32॥
कल्लाणपरंपरया लहंति जीवा विसुद्धसम्मत्तं
सम्मद्दंसणरयणं अग्घेदि सुरासुरे लोए ॥33॥
सम्मद्दंसणरयणं अग्घेदि सुरासुरे लोए ॥33॥
लद्धूण य मणुयत्तं सहियं तह उत्तमेण गोत्तेण
लद्धूण य सम्मत्तं अक्खयसोक्खं च मोक्खं च ॥34॥
लद्धूण य सम्मत्तं अक्खयसोक्खं च मोक्खं च ॥34॥
विहरदि जाव जिणिंदो सहसट्ठसुलक्खणेहिं संजुत्ते
चउतीसअइसयजुदो सा पडिमा थावरा भणिया ॥35॥
चउतीसअइसयजुदो सा पडिमा थावरा भणिया ॥35॥
बारसविहतवजुत्त कम्मं खविऊण विहिबलेण सं
वोसट्टचत्तदेहा णिव्वाणमणुत्तरं पत्त ॥36॥
वोसट्टचत्तदेहा णिव्वाणमणुत्तरं पत्त ॥36॥
सुण्णहरे तरुहिट्ठे उज्जणे तह मसाणवासे वा
गिरिगुह गिरिसिहरे वा भीमवणे अहव वसिते वा ॥42॥
सवसासत्तं तित्थं वचचइदालत्तयं च वुत्तेहिं
जिणभवणं अह बेज्झं जिणमग्गे जिणवरा विंति ॥43॥
पंचमहव्वयजुत्त पंचिंदियसंजया णिरावेक्खा
सज्झायझाणजुत्त मुणिवरवसहा णिइच्छन्ति ॥44॥
गिरिगुह गिरिसिहरे वा भीमवणे अहव वसिते वा ॥42॥
सवसासत्तं तित्थं वचचइदालत्तयं च वुत्तेहिं
जिणभवणं अह बेज्झं जिणमग्गे जिणवरा विंति ॥43॥
पंचमहव्वयजुत्त पंचिंदियसंजया णिरावेक्खा
सज्झायझाणजुत्त मुणिवरवसहा णिइच्छन्ति ॥44॥
सत्तूमित्ते य समा पसंसणिंदा अलद्धिलद्धिसमा
तणकणए समभावा पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥47॥
तणकणए समभावा पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥47॥
उत्तममज्झिमगेहे दारिद्दे ईसरे णिरावेक्खा
सव्वत्थ गिहिदपिंडा पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥48॥
सव्वत्थ गिहिदपिंडा पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥48॥
णिग्गंथा णिस्संगा णिम्माणासा अराय णिद्दोसा
णिम्मम णिरहंकारा पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥49॥
णिम्मम णिरहंकारा पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥49॥
णिण्णेहा णिल्लोहा णिम्मोहा णिव्वियार णिक्कलुसा
णिब्भय णिरासभावा पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥50॥
णिब्भय णिरासभावा पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥50॥
जहजायरूवसरिसा अवलंबियभुय णिराउहा संता
परकियणिलयणिवासा पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥51॥
परकियणिलयणिवासा पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥51॥
उवसमखमदमजुत्त सरीरसंकारवज्जिया रुक्खा
मयरायदोसरहिया पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥52॥
मयरायदोसरहिया पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥52॥
विवरीयमूढभावा पणट्ठकम्मट्ठ णट्ठमिच्छत्त
सम्मत्तगुणविसुद्धा पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥53॥
सम्मत्तगुणविसुद्धा पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥53॥
सूत्र-पाहुड
अरहंतभासियत्थं गणहरदेवेहिं गंथियं सम्मं
सुत्तत्थमग्गणत्थं सवणा साहंति परमत्थं ॥1॥
सुत्तत्थमग्गणत्थं सवणा साहंति परमत्थं ॥1॥
सुत्तम्मि जं सुदिट्ठं आइरियपरंपूरेण मग्गेण
णाऊण दुविह सुत्तं वट्टदि सिवमग्ग जो भव्वो ॥2॥
णाऊण दुविह सुत्तं वट्टदि सिवमग्ग जो भव्वो ॥2॥
सुत्तं हि जाणमाणो भवस्स भवणासणं च सो कुणदि
सूई जहा असुत्त णासदि सुत्तेण सहा णो वि ॥3॥
सूई जहा असुत्त णासदि सुत्तेण सहा णो वि ॥3॥
पुरिसो वि जो ससुत्ते ण विणांसइ सो गओ वि संसारे
सच्चेदण पच्चक्खं णासदि तं सो अदिस्समाणो वि ॥4॥
सच्चेदण पच्चक्खं णासदि तं सो अदिस्समाणो वि ॥4॥
सुत्तत्थं जिणभणियं जीवाजीवादिबहुविहं अत्थं
हेयाहेयं च तहा जो जाणइ सो हु सद्दिट्ठी ॥5॥
हेयाहेयं च तहा जो जाणइ सो हु सद्दिट्ठी ॥5॥
जं सुत्तं जिणउत्तं ववहारो तह य जाण परमत्थो
तं जाणिऊण जोई लहइ सुहं खवइ मलपुंजं ॥6॥
तं जाणिऊण जोई लहइ सुहं खवइ मलपुंजं ॥6॥
सुत्तत्थपयविणट्ठो मिच्छादिट्ठी हु सो मुणेयव्वो
खेडे वि ण कायव्वं पाणिप्पत्तं सचेलस्स ॥7॥
खेडे वि ण कायव्वं पाणिप्पत्तं सचेलस्स ॥7॥
हरिहरतुल्लो वि णरो सग्गं गच्छेइ एइ भवकोडी
तह वि ण पावइ सिद्धिं संसारत्थो पुणो भणिदो ॥8॥
तह वि ण पावइ सिद्धिं संसारत्थो पुणो भणिदो ॥8॥
उक्किट्ठसीहचरियं बहुपरियम्मो य गरुयभारो य
जो विहरइ सच्छंदं पावं गच्छदि होदि मिच्छतं ॥9॥
जो विहरइ सच्छंदं पावं गच्छदि होदि मिच्छतं ॥9॥
णिच्चेलपाणिपत्तं उवइट्ठं परमजिणवरिंदेहिं
एक्को वि मोक्खमग्गो सेसा य अमग्गया सव्वे ॥10॥
एक्को वि मोक्खमग्गो सेसा य अमग्गया सव्वे ॥10॥
जो संजमेसु सहिओ आरंभपरिग्गहेसु विरओ वि
सो होइ वंदणीओ ससुरासुरमाणुसे लोए ॥11॥
सो होइ वंदणीओ ससुरासुरमाणुसे लोए ॥11॥
जे बावीसपरीसह सहंति सत्तीसएहिं संजुत्त
ते होंति वंदणीया कम्मक्खयणिज्जरासाहू ॥12॥
ते होंति वंदणीया कम्मक्खयणिज्जरासाहू ॥12॥
अवसेसा जे लिंगी दंसणणाणेण सम्म संजुत्त
चेलेण य परिगहिया ते भणिया इच्छणिज्ज य ॥13॥
चेलेण य परिगहिया ते भणिया इच्छणिज्ज य ॥13॥
इच्छायारमहत्थं सुत्तठिओ जो हु छंडए कम्मं
ठाणे ट्ठियसम्मत्तं परलोयसुहंकरो होदि ॥14॥
ठाणे ट्ठियसम्मत्तं परलोयसुहंकरो होदि ॥14॥
अह पुण अप्पा णिच्छदि धम्माइं करेइ णिरवसेसाइं
तह वि ण पावदि सिद्धिं संसारत्थो पुणो भणिदो ॥15॥
तह वि ण पावदि सिद्धिं संसारत्थो पुणो भणिदो ॥15॥
एएण कारणेण य तं अप्पा सद्दहेह तिविहेण
जेण य लहेह मोक्खं तं जाणिज्जह पयत्तेण ॥16॥
जेण य लहेह मोक्खं तं जाणिज्जह पयत्तेण ॥16॥
वालग्गकोडिमेत्तं परिगहगहणं ण होइ साहूणं
भुंजेइ पाणिपत्ते दिण्णण्णं इक्कठाणम्मि ॥17॥
भुंजेइ पाणिपत्ते दिण्णण्णं इक्कठाणम्मि ॥17॥
जहजायरूवसरिसो तिलतुसमेत्तं ण गिहदि हत्थेसु
जइ लेइ अप्पबहुयं तत्ते पुण णिग्गोदम् ॥18॥
जइ लेइ अप्पबहुयं तत्ते पुण णिग्गोदम् ॥18॥
जस्स परिग्गहगहणं अप्पं बहुयं च हवइ लिंगस्स
सो गरहिउ जिणवयणे परिगहरहिओ णिरायारो ॥19॥
सो गरहिउ जिणवयणे परिगहरहिओ णिरायारो ॥19॥
पंचमहव्वयजुत्ते तिहिं गुत्तिहिं जो स संजदो होई
णिग्गंथमोक्खमग्गो सो होदि हु वंदणिज्जे य ॥20॥
णिग्गंथमोक्खमग्गो सो होदि हु वंदणिज्जे य ॥20॥
दुइयं च उत्त लिंगं उक्किट्ठं अवरसावयाणं च
भिक्खं भमेइ पत्ते समिदीभासेण मोणेण ॥21॥
भिक्खं भमेइ पत्ते समिदीभासेण मोणेण ॥21॥
लिंगं इत्थीण हवदि भुंजइ पिंड सुएयकालम्मि
अज्जिय वि एक्कवत्था वत्थावरणेण भुंजेदि ॥22॥
अज्जिय वि एक्कवत्था वत्थावरणेण भुंजेदि ॥22॥
ण वि सिज्झदि वत्थधरो जिणसासणे जइ वि होइ तित्थयरो
णग्गो विमोक्खमग्गो सेसा उम्मग्गया सव्वे ॥23॥
णग्गो विमोक्खमग्गो सेसा उम्मग्गया सव्वे ॥23॥
लिंगम्मि य इत्थीणं थणंतरे णाहिकक्खदेसेसु
भणिओ सुहुमो काओ तासिं कह होइ पव्वज्ज ॥24॥
भणिओ सुहुमो काओ तासिं कह होइ पव्वज्ज ॥24॥
जइ दंसणेण सुद्धा उत्त मग्गेण सावि संजुत्त
घोरं चरिय चरित्तं इत्थीसु ण 2पव्वया भणिया ॥25॥
घोरं चरिय चरित्तं इत्थीसु ण 2पव्वया भणिया ॥25॥
चित्तसोहि ण तेसिं ढिल्लं भावं तहा सहावेण
विज्जदि मासा तेसिं इत्थीसु ण संकया झाणा ॥26॥
विज्जदि मासा तेसिं इत्थीसु ण संकया झाणा ॥26॥
गाहेण अप्पगाहा समुद्दसलिले सचेलअत्थेण
इच्छा जाहु णियत्त ताह णियत्तइं सव्वदुक्खाइं ॥27॥
इच्छा जाहु णियत्त ताह णियत्तइं सव्वदुक्खाइं ॥27॥
चारित्र-पाहुड
सव्वण्हु सव्वदंसी णिम्मोहा वीयराय परमेट्ठी
वंदित्तु तिजगवंदा अरहंता भव्वजीवेहिं ॥1॥
णाणं दंसण सम्मं चारित्तं सोहिकारणं तेसिं
मोक्खाराहणहेउं चारित्तं पाहुडं वोच्छे ॥2॥युग्मम्
वंदित्तु तिजगवंदा अरहंता भव्वजीवेहिं ॥1॥
णाणं दंसण सम्मं चारित्तं सोहिकारणं तेसिं
मोक्खाराहणहेउं चारित्तं पाहुडं वोच्छे ॥2॥युग्मम्
जं जाणइ तं णाणं जं पेच्छइ तं च दंसणं भणियं
णाणस्स णिच्छियस्स य समवण्णा होइ चारित्तं ॥3॥
णाणस्स णिच्छियस्स य समवण्णा होइ चारित्तं ॥3॥
एए तिण्णि वि भावा हवंति जीवस्स अक्खयामेया
तिण्हं पि सोहणत्थे जिणभणियं दुविहं चारित्तं ॥4॥
तिण्हं पि सोहणत्थे जिणभणियं दुविहं चारित्तं ॥4॥
जिणणाणदिट्ठिसुद्धं पढमं सम्मत्तचरणचारित्तं
बिदियं संजमचरणं जिणणाणसदेसियं तं पि ॥5॥
बिदियं संजमचरणं जिणणाणसदेसियं तं पि ॥5॥
एवं चिय णाऊण य सव्वे मिच्छत्तदोस संकाइ
परिहर सम्मत्तमला जिणभणिया तिविहजोएण ॥6॥
परिहर सम्मत्तमला जिणभणिया तिविहजोएण ॥6॥
णिस्संकिय णिक्कंखिय णिव्विदिगिंछा अमूढदिट्ठी य
उवगूहण ठिदिकरणं वच्छल्ल पहावणा य ते अट्ठ ॥7॥
उवगूहण ठिदिकरणं वच्छल्ल पहावणा य ते अट्ठ ॥7॥
तं चेव गुणविसुद्धं जिणसम्मत्तं सुमुक्खठाणाए
जं चरइ णाणजुत्तं पढमं सम्मत्तचरणचारित्तं ॥8॥
जं चरइ णाणजुत्तं पढमं सम्मत्तचरणचारित्तं ॥8॥
सम्मत्तचरणसुद्धा संजमचरणस्स जइ व सुपसिद्धा
णाणी अमूढदिट्ठी अचिरे पावंति णिव्वाणं ॥9॥
णाणी अमूढदिट्ठी अचिरे पावंति णिव्वाणं ॥9॥
सम्मत्तचरणभट्ठा संजमचरणं चरंति जे वि णरा
अण्णाणणाणमूढा तह वि ण पावंति णिव्वाणं ॥10॥
अण्णाणणाणमूढा तह वि ण पावंति णिव्वाणं ॥10॥
वच्छल्लं विणएण य अणुकंपाए सुदाणदच्छाए
मग्गगुणसंसणाए अवगूहण रक्खणाए य ॥11॥
एएहिं लक्खणेहिं य लक्खिज्जइ अज्जवेहिं भावेहिं
जीवो आराहंतो जिणसम्मत्तं अमोहेण ॥12॥
मग्गगुणसंसणाए अवगूहण रक्खणाए य ॥11॥
एएहिं लक्खणेहिं य लक्खिज्जइ अज्जवेहिं भावेहिं
जीवो आराहंतो जिणसम्मत्तं अमोहेण ॥12॥
उच्छाहभावणासंपसंससेवा कुदंसणे सद्धा
अण्णाणमोहमग्गे कुव्वंतो जहदि जिणसम्मं ॥13॥
अण्णाणमोहमग्गे कुव्वंतो जहदि जिणसम्मं ॥13॥
उच्छाहभावणासंपसंससेवा सुदंसणे सद्धा
ण जहदि जिणसम्मत्तं कुव्वंतो णाणमग्गेण ॥14॥
ण जहदि जिणसम्मत्तं कुव्वंतो णाणमग्गेण ॥14॥
अण्णाणं मिच्छत्तं वज्जह णाणे विसुद्धसम्मत्ते
अह मोहं सारंभं परिहर धम्मे अहिंसाए ॥15॥
अह मोहं सारंभं परिहर धम्मे अहिंसाए ॥15॥
पव्वज्ज संगचाए पयट्ट सुतवे सुसंजमे भावे
होइ सुविसुद्धझाणं णिम्मोहे वीयरायत्ते ॥16॥
होइ सुविसुद्धझाणं णिम्मोहे वीयरायत्ते ॥16॥
मिच्छादंसणमग्गे मलिणे अण्णाणमोहदोसेहिं
वज्झंति मूढजीवा मिच्छत्तबुद्धिउदएण ॥17॥
वज्झंति मूढजीवा मिच्छत्तबुद्धिउदएण ॥17॥
सम्मद्दंसण पस्सदि जाणदि णाणेण दव्वपज्जया
सम्मेण य सद्दहदि य परिहरदि चरित्तजे दोसे ॥18॥
सम्मेण य सद्दहदि य परिहरदि चरित्तजे दोसे ॥18॥
एए तिण्णि वि भावा हवंति जीवस्स मोहरहियस्स
णियगुणमाराहंतो अचिरेण य कम्म परिहरइ ॥19॥
णियगुणमाराहंतो अचिरेण य कम्म परिहरइ ॥19॥
संखिज्जमसंखिज्जगुणं च संसारिमेरुमत्त णं
सम्मत्तमणुचरंता करेंति दुक्खक्खयं धीरा ॥20॥
सम्मत्तमणुचरंता करेंति दुक्खक्खयं धीरा ॥20॥
दुविहं संजमचरणं सायारं तह हवे णिरायारं
सायारं सग्गंथे परिग्गहा रहिय खलु णिरायारं ॥21॥
सायारं सग्गंथे परिग्गहा रहिय खलु णिरायारं ॥21॥
दंसण वय सामाइय पोसह सचित्त रायभत्ते य
बंभारंभापरिग्गह अणुमण उद्दिट्ठ देसविरदो य ॥22॥
बंभारंभापरिग्गह अणुमण उद्दिट्ठ देसविरदो य ॥22॥
पंचेव णुव्वयाइं गुणव्वयाइं हवंति तह तिण्णि
सिक्खावय चत्तरि य संजमचरणं च सायारं ॥23॥
सिक्खावय चत्तरि य संजमचरणं च सायारं ॥23॥
थूले तसकायवहे थूले मोषे अदत्तथूले य
परिहारो परमहिला परिग्गहाररंभपरिमाणं ॥24॥
परिहारो परमहिला परिग्गहाररंभपरिमाणं ॥24॥
दिसिविदि सिमाण पढमं अणत्थदंडस्स वज्जणं बिदियं
भोगोपभोगपरिमा इयमेव गुणव्वया तिण्णि ॥25॥
भोगोपभोगपरिमा इयमेव गुणव्वया तिण्णि ॥25॥
सामाइयं च पढमं बिदियं च तहेव पोसहं भणियं
तइयं च अतिहिपुज्जं चउत्थ सल्लेहणा अंते ॥26॥
तइयं च अतिहिपुज्जं चउत्थ सल्लेहणा अंते ॥26॥
एवं सावयधम्मं संजमचरणं उदेसियं सयलं
सुद्धं संजमचरणं जइधम्मं णिक्कलं वोच्छे ॥27॥
सुद्धं संजमचरणं जइधम्मं णिक्कलं वोच्छे ॥27॥
पंचेंदियसंवरणं पंच वया पंचविंसकिरियासु
पंच समिदि तय गुत्ती संजमचरणं णिरायारं ॥28॥
पंच समिदि तय गुत्ती संजमचरणं णिरायारं ॥28॥
अमणुण्णे य मणुण्णे सजीवदव्वे अजीवदव्वे य
ण करेदि रायदोसे पंचेंदियसंवरो भणिओ ॥29॥
ण करेदि रायदोसे पंचेंदियसंवरो भणिओ ॥29॥
हिंसाविरइ अहिंसा असच्चविरई अदत्तविरई य
तुरियं अबंभविरई पंचम संगम्मि विरई य ॥30॥
तुरियं अबंभविरई पंचम संगम्मि विरई य ॥30॥
साहंति जं महल्ला आयरियं जं महल्लपुव्वेहिं
जं च महल्लाणि तदो महव्वया इत्तहे याइं ॥31॥
जं च महल्लाणि तदो महव्वया इत्तहे याइं ॥31॥
वयगुत्ती मणगुत्ती इरियासमिदी सुदाणणिक्खेवो
अवलोयभोयणाए अहिंसए भावणा होंति ॥32॥
अवलोयभोयणाए अहिंसए भावणा होंति ॥32॥
कोहभयहासलोहा मोहा विवरीयभावणा चेव
विदियस्स भावणाए ए पंचेव य तहा होंति ॥33॥
विदियस्स भावणाए ए पंचेव य तहा होंति ॥33॥
सुण्णायारणिवासो विमोचियावास जं परोधं च
एसणसुद्धिसउत्तं साहम्मीसंविसंवादो ॥34॥
एसणसुद्धिसउत्तं साहम्मीसंविसंवादो ॥34॥
महिलालोयणपुव्वरइसरणसंसत्तवसहिविकहाहिं
पुट्ठियरसेहिं विरओ भावण पंचावि तुरियम्मि ॥35॥
पुट्ठियरसेहिं विरओ भावण पंचावि तुरियम्मि ॥35॥
अपरिग्गह समणुण्णेसु सद्दपरिसरसरूवगंधेसु
रायद्दोसाईणं परिहारो भावणा होंति ॥36॥
रायद्दोसाईणं परिहारो भावणा होंति ॥36॥
इरिया भासा एसण जा सा आदाण चेव णिक्खेवो
संजमसोहिणिमित्तं खंति जिणा पंच समिदीओ ॥37॥
संजमसोहिणिमित्तं खंति जिणा पंच समिदीओ ॥37॥
भव्वजणबोहणत्थं जिणमग्गे जिणवरेहि जह भणियं
णाणं णाणसरूवं अप्पाणं तं वियाणेहि ॥38॥
णाणं णाणसरूवं अप्पाणं तं वियाणेहि ॥38॥
जीवाजीवविभत्ती जो जाणइ सो हवेइ सण्णाणी
रायादिदोसरहिओ जिणसासणे मोक्खमग्गोत्ति ॥39॥
रायादिदोसरहिओ जिणसासणे मोक्खमग्गोत्ति ॥39॥
दंसणणाणचरित्तं तिण्णि वि जाणेह परमसद्धाए
जं जाणिऊण जोई अइरेण लहंति णिव्वाणं ॥40॥
जं जाणिऊण जोई अइरेण लहंति णिव्वाणं ॥40॥
पाऊण णाणसलिलं णिम्मलसुविशुद्धभावसंजुता
होंति सिवालयवासी तिहुवणचूड़ामणी सिद्धा ॥41॥
होंति सिवालयवासी तिहुवणचूड़ामणी सिद्धा ॥41॥
णाणगुणेहिं विहीणा ण लहंते ते सुइच्छियं लाहं
इय णाउं गुणदोसं तं सण्णाणं वियाणेहिं ॥42॥
इय णाउं गुणदोसं तं सण्णाणं वियाणेहिं ॥42॥
चारित्तसमारूढो अप्पासु परं ण ईहए णाणी
पावइ अइरेण सुहं अणोवमं जाण णिच्छयदो ॥43॥
पावइ अइरेण सुहं अणोवमं जाण णिच्छयदो ॥43॥
एवं संखेवेण य भणियं णाणेण वीयराएण
सम्मत्तसंजमासयदुण्हं पि उदेसियं चरणं ॥44॥
सम्मत्तसंजमासयदुण्हं पि उदेसियं चरणं ॥44॥
भावेह भावसुद्धं फुडु रइयं चरणपाहुणं चेव
लहु चउगइ चइऊणं अइरेणऽपुणब्भवा होई ॥45॥
लहु चउगइ चइऊणं अइरेणऽपुणब्भवा होई ॥45॥
बोध-पाहुड
बहुसत्थअत्थजाणे संजमसम्मत्तसुद्धतवयरणे
वंदित्त आयरिए कसायमलवज्जिदे सुद्धे ॥1॥
सयलजणबोहणत्थं जिणमग्गे जिणवरेहिं जह भणियं
वोच्छामि समासेण छक्कायसुहंकरं सुणहं ॥2॥
वंदित्त आयरिए कसायमलवज्जिदे सुद्धे ॥1॥
सयलजणबोहणत्थं जिणमग्गे जिणवरेहिं जह भणियं
वोच्छामि समासेण छक्कायसुहंकरं सुणहं ॥2॥
आयदणं चेदिहरं, जिणपडिमा दंसणं च जिणबिंबं
भणियं सुवीयरायं, जिणुमुद्दा णाणमादत्थं ॥3॥
अरहंतेण सुदिट्ठं, जं देवं तित्थमिह य अरहंतं
पावज्जगुणविसुद्धा, इय णायव्वा जहाकमसो ॥4॥
भणियं सुवीयरायं, जिणुमुद्दा णाणमादत्थं ॥3॥
अरहंतेण सुदिट्ठं, जं देवं तित्थमिह य अरहंतं
पावज्जगुणविसुद्धा, इय णायव्वा जहाकमसो ॥4॥
मणवयणकायदव्वा आयत्त जस्स इन्दिया विसया
आयदणं जिणमग्गे णिद्दिट्ठं संजयं रूवं ॥5॥
आयदणं जिणमग्गे णिद्दिट्ठं संजयं रूवं ॥5॥
मयरायदोस मोहो कोहो लोहो य जस्स आयत्त
पंचमहव्वयधारी आयदणं महरिसी भणियं ॥6॥
पंचमहव्वयधारी आयदणं महरिसी भणियं ॥6॥
सिद्धं जस्स सदत्थं विसुद्धझाणस्स णाणजुत्तस्स
सिद्धायदणं सिद्धं मुणिवरवसहस्स मुणिदत्थं ॥7॥
सिद्धायदणं सिद्धं मुणिवरवसहस्स मुणिदत्थं ॥7॥
बुद्धं जं बोहंतो अप्पाणं चेदयाइं अण्णं च
पंचमहव्वयसुद्धं णाणमयं जाण चेदिहरं ॥8॥
पंचमहव्वयसुद्धं णाणमयं जाण चेदिहरं ॥8॥
चेइयं बंधं मोक्खं दुक्खं सुक्खं च अप्पयं तस्स
चेइहरं जिणमग्गे छक्कायहियंकरं भणियं ॥9॥
चेइहरं जिणमग्गे छक्कायहियंकरं भणियं ॥9॥
सपरा जंगमदेहा दंसणणाणेण सुद्धचरणाणं
णिग्गंथवीयराया जिणमग्गे एरिसा पडिमा ॥10॥
णिग्गंथवीयराया जिणमग्गे एरिसा पडिमा ॥10॥
जं चरदि सुद्धचरणं जाणइ णिच्छेइ सुद्धसम्मत्तं
सा होई वंदणीया णिग्गंथा संजदा पडिमा ॥11॥
सा होई वंदणीया णिग्गंथा संजदा पडिमा ॥11॥
दंसणअणंतणाणं अणंतवीरिय अणंतसुक्खा य
सासयसुक्ख अदेहा मुक्का कम्मट्ठबंधेहिं ॥12॥
णिरुवममचलमखोहा णिम्मिविया जंगमेण रूवेण
सिद्धठ्ठाणम्मि ठिया वोसरपडिमा धुवा सिद्धा ॥13॥
सासयसुक्ख अदेहा मुक्का कम्मट्ठबंधेहिं ॥12॥
णिरुवममचलमखोहा णिम्मिविया जंगमेण रूवेण
सिद्धठ्ठाणम्मि ठिया वोसरपडिमा धुवा सिद्धा ॥13॥
दंसेइ मोक्खमग्गं सम्मत्तं संजमं सुधम्मं च
णिग्गंथं णाणमयं जिणमग्गे दंसणं भणियं ॥14॥
णिग्गंथं णाणमयं जिणमग्गे दंसणं भणियं ॥14॥
जह फुल्लं गंधमयं भवति हु खीरं स घियमयं चावि
तह दंसणं हि सम्मं णाणमयं होइ रूवत्थं ॥15॥
तह दंसणं हि सम्मं णाणमयं होइ रूवत्थं ॥15॥
जिणबिंबं णाणमयं संजमसुद्धं सुवीयरायं च
जं देह दिक्खसिक्खा कम्मक्खयकारणे सुद्धा ॥16॥
जं देह दिक्खसिक्खा कम्मक्खयकारणे सुद्धा ॥16॥
तस्स य करह पणामं सव्वं पुज्जं च विणय वच्छल्लं
जस्स य दंसण णाणं अत्थि धुवं चेयणाभावो ॥17॥
जस्स य दंसण णाणं अत्थि धुवं चेयणाभावो ॥17॥
तववयगुणेहिं सुद्धो जाणदि पिच्छेइ सुद्धसम्मत्तं
अरहन्तमुद्द एसा दायारी दिक्खसिक्खा य ॥18॥
अरहन्तमुद्द एसा दायारी दिक्खसिक्खा य ॥18॥
दढसंजममुद्दाए इन्दियमुद्दा कसायदिढमुद्दा
मुद्दा इह णाणाए जिणमुद्रा एरिसा भणिया ॥19॥
मुद्दा इह णाणाए जिणमुद्रा एरिसा भणिया ॥19॥
संजमसंजुत्तस्स य सुझाणजोयस्स मोक्खमग्गस्स
णाणेण लहदि लक्खं तम्हा णाणं च णायव्वं ॥20॥
णाणेण लहदि लक्खं तम्हा णाणं च णायव्वं ॥20॥
जह णवि लहदि हु लक्खं रहिओ कंडस्स वेज्झयविहीणो
तह णवि लक्खदि लक्खं अण्णाणी मोक्खमग्गस्स ॥21॥
तह णवि लक्खदि लक्खं अण्णाणी मोक्खमग्गस्स ॥21॥
णाणं पुरिस्स हवदि लहदि सुपुरिसो वि विणयसंजुत्ते
णाणेण लहदि लक्खं लक्खंतो मोक्खमग्गस्स ॥22॥
णाणेण लहदि लक्खं लक्खंतो मोक्खमग्गस्स ॥22॥
मइधणुहं जस्स थिरं सुदगुण बाणा सुअत्थि रयणत्तं
परमत्थबद्धलक्खो णवि चुक्कदि मोक्खमग्गस्स ॥23॥
परमत्थबद्धलक्खो णवि चुक्कदि मोक्खमग्गस्स ॥23॥
सो देवो जो अत्थं धम्मं कामांशुदेइ णाणं च
सो दइ जस्स अत्थि हु अत्थो धम्मो य पवज्ज ॥24॥
सो दइ जस्स अत्थि हु अत्थो धम्मो य पवज्ज ॥24॥
धम्मो दयाविसुद्धो पव्वज्ज सव्वसंगपरिचत्त
देवो ववगयमोहो उदयकरो भव्वजीवाणं ॥25॥
देवो ववगयमोहो उदयकरो भव्वजीवाणं ॥25॥
वयसम्मत्तविसुद्धे पंचेंदियसंजदे णिरावेक्खे
ण्हाएउ मुणी तित्थे, दिक्खासिक्खासुण्हाणेण ॥26॥
ण्हाएउ मुणी तित्थे, दिक्खासिक्खासुण्हाणेण ॥26॥
जं णिम्मलं सुधम्मं सम्मत्तं संजमं तवं णाणं
तं तित्थं जिणमग्गे हवेइ जदि सतिभावेण ॥27॥
तं तित्थं जिणमग्गे हवेइ जदि सतिभावेण ॥27॥
णामे ठवणे हि संदव्वे भावे हि सगुणपज्जाया
चउणागदि संपदिमे1 भावा भावंति अरहंतं ॥28॥
चउणागदि संपदिमे1 भावा भावंति अरहंतं ॥28॥
दंसण अणंत णाणे मोक्खो णट्ठट्ठकम्मबंधेण
णिरुवमगुणमारूढो अरहंतो एरिसो होइ ॥29॥
णिरुवमगुणमारूढो अरहंतो एरिसो होइ ॥29॥
जरवाहिजम्ममरणं चउगइगमणं च पुण्णपावं च
हंतूण दोसकम्मे हुउ णाणमयं च अरहंतो ॥30॥
हंतूण दोसकम्मे हुउ णाणमयं च अरहंतो ॥30॥
गुणठाणमग्गणेहिं य पज्जत्तीपाणजीवठाणेहिं
ठावण पंचविहेहिं पणयव्वा अरहपुरिसस्स ॥31॥
ठावण पंचविहेहिं पणयव्वा अरहपुरिसस्स ॥31॥
तेरहमे गुणठाणे सजोइकेवलिय होइ अरहंतो
चउतीस अइसयगुणा होंति हु तस्सट्ठ पडिहारा ॥32॥
चउतीस अइसयगुणा होंति हु तस्सट्ठ पडिहारा ॥32॥
गइ इंदियं च काए जोए वेए कसाय णाणे य
संजम दंसण लेसा भविया सम्मत्त सण्णि आहारे ॥33॥
संजम दंसण लेसा भविया सम्मत्त सण्णि आहारे ॥33॥
आहारो य सरीरो इंदियमणआणपाणभासा य
पज्जत्तिगुणसमिद्धो उत्तमदेवो हवइ अरहो ॥34॥
पज्जत्तिगुणसमिद्धो उत्तमदेवो हवइ अरहो ॥34॥
पंच वि इंदियपाणा मणवयकाएण तिण्णि बलपाणा
आणप्पाणप्पाणा आउगपाणेण होंति दह पाणा ॥35॥
आणप्पाणप्पाणा आउगपाणेण होंति दह पाणा ॥35॥
मणुयभवे पंचिंदिय जीवट्ठाणेसु होइ चउदसमे
एदे गुणगणजुत्ते गुणमारूढो हवइ अरहो ॥36॥
एदे गुणगणजुत्ते गुणमारूढो हवइ अरहो ॥36॥
जरवाहिदुक्खरहियं आहारणिहारवज्जियं विमलं
सिंहाण खेले सेओ णत्थि दुगुंछा य दोसो य ॥37॥
दस पाणा पज्जती अट्ठसहस्सा य लक्खणा भणिया
गोखीरसंखधवलं मंसं रुहिरं च सव्वंगे ॥38॥
एरिसगुणेहिं सव्वं अइसयवंतं सुपरिमलामोयं
ओरालियं च कायं णायव्वं अरहपुरिसस्स ॥39॥
सिंहाण खेले सेओ णत्थि दुगुंछा य दोसो य ॥37॥
दस पाणा पज्जती अट्ठसहस्सा य लक्खणा भणिया
गोखीरसंखधवलं मंसं रुहिरं च सव्वंगे ॥38॥
एरिसगुणेहिं सव्वं अइसयवंतं सुपरिमलामोयं
ओरालियं च कायं णायव्वं अरहपुरिसस्स ॥39॥
मयरायदोसरहिओ कसायमलवज्जिओ य सुविशुद्धो
चित्तपरिणामरहिदो केवलभावे मुणेयव्वो ॥40॥
सम्मद्दंसणि पस्सदि जाणदि णाणेण दव्वपज्जया
सम्मत्तगुणविशुद्धो भावो अरहस्स णायव्वो ॥41॥
चित्तपरिणामरहिदो केवलभावे मुणेयव्वो ॥40॥
सम्मद्दंसणि पस्सदि जाणदि णाणेण दव्वपज्जया
सम्मत्तगुणविशुद्धो भावो अरहस्स णायव्वो ॥41॥
सुण्णहरे तरुहिट्ठे उज्जणे तह मसाणवासे वा
गिरिगुह गिरिसिहरे वा भीमवणे अहव वसिते वा ॥42॥
1सवसासत्तं तित्थं 2वचचइदालत्तयं च वुत्तेहिं
जिणभवणं अह बेज्झं जिणमग्गे जिणवरा विंति ॥43॥
पंचमहव्वयजुत्त पंचिंदियसंजया णिरावेक्खा
सज्झायझाणजुत्त मुणिवरवसहा णिइच्छन्ति ॥44॥
गिरिगुह गिरिसिहरे वा भीमवणे अहव वसिते वा ॥42॥
1सवसासत्तं तित्थं 2वचचइदालत्तयं च वुत्तेहिं
जिणभवणं अह बेज्झं जिणमग्गे जिणवरा विंति ॥43॥
पंचमहव्वयजुत्त पंचिंदियसंजया णिरावेक्खा
सज्झायझाणजुत्त मुणिवरवसहा णिइच्छन्ति ॥44॥
गिहगंथमोहमुक्का बावीसपरीसहा जियकषाया
पावारंभविमुक्का पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥45॥
पावारंभविमुक्का पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥45॥
धणधण्णवत्थदाणं हिरण्णसयणासणाइ छत्तइं
कुद्दाणविरहरहिया पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥46॥
कुद्दाणविरहरहिया पव्वज्जा एरिसा भणिया ॥46॥
सत्तूमित्ते य समा पसंसणिंदा अलद्धिलद्धिसमा
तणकणए समभावा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥47॥
तणकणए समभावा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥47॥
उत्तममज्झिमगेहे दारिद्दे ईसरे णिरावेक्खा
सव्वत्थ गिहिदपिंडा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥48॥
सव्वत्थ गिहिदपिंडा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥48॥
णिग्गंथा णिस्संगा णिम्माणासा अराय णिद्दोसा
णिम्मम णिरहंकारा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥49॥
णिम्मम णिरहंकारा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥49॥
णिण्णेहा णिल्लोहा णिम्मोहा णिव्वियार णिक्कलुसा
णिब्भय णिरासभावा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥50॥
णिब्भय णिरासभावा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥50॥
जहजायरूवसरिसा अवलंबियभुय णिराउहा संता
परकियणिलयणिवासा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥51॥
परकियणिलयणिवासा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥51॥
उवसमखमदमजुत्त सरीरसंकारवज्जिया रुक्खा
मयरायदोसरहिया पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥52॥
मयरायदोसरहिया पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥52॥
विवरीयमूढभावा पणट्ठकम्मट्ठ णट्ठमिच्छत्त
सम्मत्तगुणविसुद्धा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥53॥
सम्मत्तगुणविसुद्धा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥53॥
जिणमग्गे पव्वज्ज छहसंहणणेसु भणिय णिग्गंथा
भावंति भव्वपुरिसा कम्मक्खयकारणे भणिया ॥54॥
भावंति भव्वपुरिसा कम्मक्खयकारणे भणिया ॥54॥
तिलतुसमत्तणिमित्तसम बाहिरग्गंधसंगहो णत्थि
पव्वज्ज हवइ एसा जह भणिया सव्वदरसीहिं ॥55॥
पव्वज्ज हवइ एसा जह भणिया सव्वदरसीहिं ॥55॥
उवसग्गपरिसहसहा णिज्जणदेसे हि णिच्च 1अत्थइ
सिल कट्ठे भूमितले सव्वे आरुहइ सव्वत्थ ॥56॥
सिल कट्ठे भूमितले सव्वे आरुहइ सव्वत्थ ॥56॥
पसुमहिलसंढसंगं कुसीलसंगं ण कुणइ विकहाओ
सज्झायझाणजुत्त पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥57॥
सज्झायझाणजुत्त पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥57॥
तववयगुणेहिं सुद्धा संजमसम्मत्तगुणविसुद्धा य
सुद्धा गुणेहिं सुद्धा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥58॥
सुद्धा गुणेहिं सुद्धा पव्वज्ज एरिसा भणिया ॥58॥
एवं 1आयत्तणगुणपज्जंता बहुविसुद्धसम्मत्ते
णिग्गंथे जिणमग्गे संखेवेणं जहाखादं ॥59॥
णिग्गंथे जिणमग्गे संखेवेणं जहाखादं ॥59॥
रूवत्थं सुद्धत्थं जिणमग्गे जिणवरेहिं जह भणियं
भव्वजणबोहणत्थं छक्कायहियंकरं उत्तं ॥60॥
भव्वजणबोहणत्थं छक्कायहियंकरं उत्तं ॥60॥
सद्दवियारो हूओ भासासुत्तेसु जं जिणे कहियं
सो तह कहियं णायं सीसेण य भद्दबाहुस्स ॥61॥
सो तह कहियं णायं सीसेण य भद्दबाहुस्स ॥61॥
बारसअंगवियाणं चउदसपुव्वंगविउलवित्थरणं
सुयणाणि भद्दबाहू गमयगुरू भयवओ जयउ ॥62॥
सुयणाणि भद्दबाहू गमयगुरू भयवओ जयउ ॥62॥
भाव-पाहुड
णमिऊण जिणवरिं दे णरसुरभवणिंदवंदिए सिद्धे
वोच्छामि भावपाहुडमवसेसे संजदे सिरसा ॥1॥
वोच्छामि भावपाहुडमवसेसे संजदे सिरसा ॥1॥
भावो हि पढमलिंगं, ण दव्वलिंगं च जाण परमत्थं
भावो कारणभूदो, गुणदोसाणं जिणा वेन्ति ॥2॥
भावो कारणभूदो, गुणदोसाणं जिणा वेन्ति ॥2॥
भावविसुद्धिणिमित्तं, बहिरंगस्स कीरए चाओ
बाहिरचाओ विहलो, अब्भंतरगंथजुत्तस्स ॥3॥
बाहिरचाओ विहलो, अब्भंतरगंथजुत्तस्स ॥3॥
भावरहिओ ण सिज्झइ जइ वि तवं चरइ कोडिकोडीओ
जम्मंतराइ बहुसो लंवियहत्थो गलियवत्थो ॥4॥
जम्मंतराइ बहुसो लंवियहत्थो गलियवत्थो ॥4॥
परिणामम्मि असुद्धे गंथे मुञ्चेइ बाहिरे य जई
बाहिरगंथच्चाओ भावविहूणस्स किं कुणइ ॥5॥
बाहिरगंथच्चाओ भावविहूणस्स किं कुणइ ॥5॥
जाणहि भावं पढमं किं ते लिंगेण भावरहिएण
पंथिय सिवपुरिपंथं जिणउवइट्ठं पयत्तेण ॥6॥
पंथिय सिवपुरिपंथं जिणउवइट्ठं पयत्तेण ॥6॥
भावरहिएण सपुरिस अणाइकालं अणंतसंसारें
गहिउज्झियाइं बहुसो बाहिरणिग्गंथरूवाइं ॥7॥
गहिउज्झियाइं बहुसो बाहिरणिग्गंथरूवाइं ॥7॥
भीसणणरयगईए तिरियगईए कुदेवमणुगइए
पत्तो सि तिव्वदुक्खं भावहि जिणभावणा जीव ! ॥8॥
पत्तो सि तिव्वदुक्खं भावहि जिणभावणा जीव ! ॥8॥
सत्तसु णरयावासे दारुणभीमाइं असहणीयाइं
भुताइं सुइरकालं दुःक्खाइं णिरंतरं सहियं ॥9॥
भुताइं सुइरकालं दुःक्खाइं णिरंतरं सहियं ॥9॥
खणणुत्तावणवालण, वेयणविच्छेयणाणिरोहं च
पत्तोसि भावरहिओ, तिरियगईए चिरं कालं ॥10॥
पत्तोसि भावरहिओ, तिरियगईए चिरं कालं ॥10॥
आगंतुक माणसियं सहजं सारीरियं च चत्तारि
दुक्खाइं मणुयजम्मे पत्तो सि अणंतयं कालं ॥11॥
दुक्खाइं मणुयजम्मे पत्तो सि अणंतयं कालं ॥11॥
सुरणिलयेसु सुरच्छरविओयकाले य माणसं तिव्वं
संपत्तो सि महाजस दुःखं सुहभावणारहिओ ॥12॥
संपत्तो सि महाजस दुःखं सुहभावणारहिओ ॥12॥
कंदप्पमाइयाओ पंच वि असुहादिभावणाई य
भाऊण दव्वलिंगी पहीणदेवो दिवे जाओ ॥13॥
भाऊण दव्वलिंगी पहीणदेवो दिवे जाओ ॥13॥
पासत्थभावणाओ अणाइकालं अणेयवाराओ
भाऊण दुहं पत्तो कुभावणाभावबीएहिं ॥14॥
भाऊण दुहं पत्तो कुभावणाभावबीएहिं ॥14॥
देवाण गुण विहूई इड्ढी माहप्प बहुविहं दट्ठुं
होऊण हीणदेवो पत्तो बहु माणसं दुक्खं ॥15॥
होऊण हीणदेवो पत्तो बहु माणसं दुक्खं ॥15॥
चउविहविकहासत्तो मयमत्तो असुहभावपयडत्थो
होऊण कुदेवत्तं पत्तो सि अणेयवाराओ ॥16॥
होऊण कुदेवत्तं पत्तो सि अणेयवाराओ ॥16॥
असुईबीहत्थेहि य कलिमलबहुलाहि गब्भवसहीहि
वसिओ सि चिरं कालं अणेयजणणीण मुणिपवर ॥17॥
वसिओ सि चिरं कालं अणेयजणणीण मुणिपवर ॥17॥
पीओ सि थणच्छीरं अणंतजम्मंतराइं जणणीणं
अण्णाण्णाण महाजस सायरसलिलादु अहिययरं ॥18॥
अण्णाण्णाण महाजस सायरसलिलादु अहिययरं ॥18॥
तुह मरणे दुक्खेण अण्णण्णाणं अणेयजणणीणं
रुण्णाण णयणणीरं सायरसलिलादु अहिययरं ॥19॥
रुण्णाण णयणणीरं सायरसलिलादु अहिययरं ॥19॥
भवसायरे अणंते छिण्णुज्झिय केसणहरणालट्ठी
पुञ्जइ जइ को वि जए हवदि य गिरिसमधिया रासी ॥20॥
पुञ्जइ जइ को वि जए हवदि य गिरिसमधिया रासी ॥20॥
जलथलसिहिपवणंबरगिरिसरिदरितरुवणाइ सव्वत्थ
वसिओ सि चिरं कालं तिहुवणमज्झे अणप्पवसो ॥21॥
वसिओ सि चिरं कालं तिहुवणमज्झे अणप्पवसो ॥21॥
गसियाइं पुग्गलाइं भुवणोदरवित्तियाइं सव्वाइं
पत्तो सि तो ण तित्तिं पुणरुत्तं ताइं भुञ्जंतो ॥22॥
पत्तो सि तो ण तित्तिं पुणरुत्तं ताइं भुञ्जंतो ॥22॥
तिहुयणसलिलं सयलं पीयं तिण्हाए पी़डिएण तुमे
तो वि ण तण्हाछेओ जाओ चिंतेह भवमहणं ॥23॥
तो वि ण तण्हाछेओ जाओ चिंतेह भवमहणं ॥23॥
गहिउज्झियाइं मुणिवर कलेवराइं तुमे अणेयाइं
ताणं णत्थि पमाणं अणंतभवसायरे धीर ॥24॥
ताणं णत्थि पमाणं अणंतभवसायरे धीर ॥24॥
विसवेयणरत्तक्खयभयसत्थग्गहणसंकिलेसेणं
आहारुस्सासाणं णिरोहणा खिज्जए आऊ ॥25॥
हिमजलणसलिलगुरुयरपव्वयतरुरुहणपडणभंगेहिं
रसविज्जजोयधारण अणयपसंगेहिं विविहेहिं ॥26॥
इय तिरियमणुयजम्मे सुइरं उववज्जिऊण बहुवारं
अवमिच्चुमहादुक्खं तिव्वं पत्तो सि तं मित्त ॥27॥
आहारुस्सासाणं णिरोहणा खिज्जए आऊ ॥25॥
हिमजलणसलिलगुरुयरपव्वयतरुरुहणपडणभंगेहिं
रसविज्जजोयधारण अणयपसंगेहिं विविहेहिं ॥26॥
इय तिरियमणुयजम्मे सुइरं उववज्जिऊण बहुवारं
अवमिच्चुमहादुक्खं तिव्वं पत्तो सि तं मित्त ॥27॥
छत्तीस तिण्णि सया छावट्ठिसहस्सवारमरणाणि
अतोमुहुत्तमज्झे पत्तो सि निगोयवासम्मि ॥28॥
अतोमुहुत्तमज्झे पत्तो सि निगोयवासम्मि ॥28॥
वियलिंदए असीदी सट्ठ चालीसमेव जाणेह
पंचिंदिय चउवीसं खुद्दभावंतोमुहुत्तस्स ॥29॥
पंचिंदिय चउवीसं खुद्दभावंतोमुहुत्तस्स ॥29॥
रयणत्तये अलद्धे एवं भमिओ सि दीहसंसारे
इय जिणवरेहिं भणियं तं रयणत्तय समायरह ॥30॥
इय जिणवरेहिं भणियं तं रयणत्तय समायरह ॥30॥
अप्पा अप्पम्मि रओ सम्माइट्ठी हवेइ फुडु जीवो
जाणइ तं सण्णाणं चरदिहं चारित्त मग्गो त्ति ॥31॥
जाणइ तं सण्णाणं चरदिहं चारित्त मग्गो त्ति ॥31॥
अण्णे कुमरणमरणं अणेयजम्मंतराइं मरिओ सि
भावहि सुमरणमरणं जरमरणविणासणं जीव ! ॥32॥
भावहि सुमरणमरणं जरमरणविणासणं जीव ! ॥32॥
सो णत्थि दव्वसवणो परमाणुपमाणमेत्तओ णिलओ
जत्थ ण जाओ ण मओ तियलोपमाणिओ सव्वो ॥33॥
जत्थ ण जाओ ण मओ तियलोपमाणिओ सव्वो ॥33॥
कालमणंतं जीवो जम्मजरामरणपीडिओ दुक्खं
जिणलिंगेण वि पत्तो परंपराभावरहिएण ॥34॥
जिणलिंगेण वि पत्तो परंपराभावरहिएण ॥34॥
पडिदेससमयपुग्गलआउगपरिणामणामकालट्ठं
गहिउज्झियाइं बहुसो अणंतभवसायरे जीव ॥35॥
गहिउज्झियाइं बहुसो अणंतभवसायरे जीव ॥35॥
तेयाला तिण्णि सया रज्जूणं लोयखेत्तपरिमाणं
मुत्तूणट्ठ पएसा जत्थ जण ढुरुढुल्लिओ जीवो ॥36॥
मुत्तूणट्ठ पएसा जत्थ जण ढुरुढुल्लिओ जीवो ॥36॥
एक्केक्कंगुलि वाही छण्णवदी होंति जाण मणुयाणं
अवसेसे य सरीरे रोया भण कित्तिया भणिया ॥37॥
अवसेसे य सरीरे रोया भण कित्तिया भणिया ॥37॥
ते रोया वि य सयला सहिया ते परवसेण पुव्वभवे
एवं सहसि महाजस किं वा बहुएहिं लविएहिं ॥38॥
एवं सहसि महाजस किं वा बहुएहिं लविएहिं ॥38॥
पित्तंतमुत्तफेफसकालिज्जयरुहिरखरिसकिमिजाले
उयरे वसिओ सि चिरं णवदसमासेहिं पत्तेहिं ॥39॥
उयरे वसिओ सि चिरं णवदसमासेहिं पत्तेहिं ॥39॥
दियसंगट्ठियमसणं आहारिय मायभुत्तमण्णांते
छद्दिखरिसाण मज्झे जढरे वसिओ सि जणणीए ॥40॥
छद्दिखरिसाण मज्झे जढरे वसिओ सि जणणीए ॥40॥
सिसुकाले य अयाणे असुईमज्झम्मि लोलिओ सि तुमं
असुई असिया बहुसो मुणिवर बालत्तपत्तेण ॥41॥
असुई असिया बहुसो मुणिवर बालत्तपत्तेण ॥41॥
मंसट्ठिसुक्कसोमियपित्ततसवत्तकुणिमदुग्गंधं
खरिसवसापूय खिब्भिस भरियं चिंतेहि देहउडं ॥42॥
खरिसवसापूय खिब्भिस भरियं चिंतेहि देहउडं ॥42॥
भावविमुत्तो मुत्तो ण य मुत्तो बंधवाइमित्तेण
इय भाविऊण उज्झसु गंथं अब्भंतरं धीर ॥43॥
इय भाविऊण उज्झसु गंथं अब्भंतरं धीर ॥43॥
देहादिचत्तसंगो माणकसाएण कलुसिओ धीर !
अत्ताववेण जादो बाहुबली कित्तियं* कालं ॥44॥
अत्ताववेण जादो बाहुबली कित्तियं* कालं ॥44॥
महुपिंगो णाम मुणी देहाहारादिचत्तवावारो
सवणत्तणं ण पत्तो णियाणमित्तेण भवियणुय ॥45॥
सवणत्तणं ण पत्तो णियाणमित्तेण भवियणुय ॥45॥
अण्णं च वसिट्ठमुणी पत्तो दुक्खं णियाणदोसेण
सो णत्थि वासठाणो जत्थ ण ढुरुढुल्लिओ जीवो ॥46॥
सो णत्थि वासठाणो जत्थ ण ढुरुढुल्लिओ जीवो ॥46॥
सो णत्थि तप्पएसो चउरासीलक्खजोणिवासम्मि
भावविरओ वि सवणो जत्थ ण ढुरुढुल्लिओ जीव ॥47॥
भावविरओ वि सवणो जत्थ ण ढुरुढुल्लिओ जीव ॥47॥
भावेण होइ लिंगी ण हु लिंगी होइ दव्वमित्तेण
तम्हा कुणिज्ज भावं किं कीरइ दव्वलिंगेण ॥48॥
तम्हा कुणिज्ज भावं किं कीरइ दव्वलिंगेण ॥48॥
दंडयणयरं सयलं डहिओ अब्भंतरेण दोसेण
जिणलिंगेण वि बाहू पडिओ सो रउरवे णरए ॥49॥
जिणलिंगेण वि बाहू पडिओ सो रउरवे णरए ॥49॥
अवरो वि दव्वसवणो दंसणवरणाणचरणपब्भट्ठो
दीवायणो त्ति णामो अणंतसंसारिओ जाओ ॥50॥
दीवायणो त्ति णामो अणंतसंसारिओ जाओ ॥50॥
भावसमणो य धीरो जुवईजणवेढिओ विसुद्धमई
णामेण सिवकुमारो परीत्तसंसारिओ जादो ॥51॥
णामेण सिवकुमारो परीत्तसंसारिओ जादो ॥51॥
केवलिजिणपण्णत्तं एयादसअंग सयलसुयणाणं
पढिओ अभव्वसेणो ण भावसवणत्तणं पत्तो ॥52॥
पढिओ अभव्वसेणो ण भावसवणत्तणं पत्तो ॥52॥
तुसमासं घोसंतो भावविसुद्धो महाणुभावो य
णामेव य सिवभूई केवलीणाणी फुडं जाओ ॥53॥
णामेव य सिवभूई केवलीणाणी फुडं जाओ ॥53॥
भावेण होइ णग्गो बाहिरलिंगेण किं च णग्गेण
कम्मपयडीण णियरं णासइ भावेण दव्वेण ॥54॥
कम्मपयडीण णियरं णासइ भावेण दव्वेण ॥54॥
णग्गत्तणं अकज्जं भावणरहियं जिणेहिं पण्णत्तं
इय जाऊण य णिच्चं भाविज्जहि अप्पयं धीर ॥55॥
इय जाऊण य णिच्चं भाविज्जहि अप्पयं धीर ॥55॥
देहादिसंगरहिओ माणकसाएहिं सयलपरिचत्तो
अप्पा अप्पम्मि रओ स भावलिंगी हवे साहू ॥56॥
अप्पा अप्पम्मि रओ स भावलिंगी हवे साहू ॥56॥
ममत्तिं परिवज्जामि णिम्ममत्तिमुवट्ठिदो
आलंबणं च मे आदा अवसेसाइं बोसरे ॥57॥
आलंबणं च मे आदा अवसेसाइं बोसरे ॥57॥
आदा खु मज्झ णाणे आदा मे दंसणे चरित्ते य
आदा पच्चक्खाणे आदा मे संवरे जोगे ॥58॥
आदा पच्चक्खाणे आदा मे संवरे जोगे ॥58॥
एगो मे सस्सदो अप्पा णाणदंसणलक्खणो
सेसा मे बाहिरा भावा सव्वे संजोगलक्खणा ॥59॥
सेसा मे बाहिरा भावा सव्वे संजोगलक्खणा ॥59॥
भावेह भावसुद्धं अप्पा सुविसुद्धणिम्मलं चेव
लहु चउगइ चइऊणं जइ इच्छह सासयं सुक्खं ॥60॥
लहु चउगइ चइऊणं जइ इच्छह सासयं सुक्खं ॥60॥
जो जीवो भावंतो जीवसहावं सुभावसंजुत्तो
सो जरमरणविणासं कुणइ फुडं लहइ णिव्वाणं ॥61॥
सो जरमरणविणासं कुणइ फुडं लहइ णिव्वाणं ॥61॥
जीवो जिणपण्णत्तो णाणसहाओ य चेयणासहिओ
सो जीवो णायव्वो कम्मक्खयकरणणिम्मित्तो ॥62॥
सो जीवो णायव्वो कम्मक्खयकरणणिम्मित्तो ॥62॥
जेसिं जीवसहावो णत्थि अभावो य सव्वहा तत्थ
ते होंति भिण्णदेहा सिद्धा वचिगोयरमदीदा ॥63॥
ते होंति भिण्णदेहा सिद्धा वचिगोयरमदीदा ॥63॥
अरसमरूवमगंधं अव्वत्तं चेदणागुणमसद्दं
जाण अलिंगग्गहणं जीवमणिद्दिट्ठिसंठाणं ॥64॥
जाण अलिंगग्गहणं जीवमणिद्दिट्ठिसंठाणं ॥64॥
भावहि पंचपयारं णाणं अण्णाणणासणं सिग्घं
भावणभावियसहिओ दिवसिवसुहभायणो होइ ॥65॥
भावणभावियसहिओ दिवसिवसुहभायणो होइ ॥65॥
पढिएण वि किं कीरइ किं वा सुणिएण भावरहिएण
भावो कारणभूदो सायारणयारभूदाणं ॥66॥
भावो कारणभूदो सायारणयारभूदाणं ॥66॥
दव्वेण सयल णग्गा णारयतिरिया य सयलसंघाया
पारिणामेण असुद्धा ण भावसवणत्तणं पत्ता ॥67॥
पारिणामेण असुद्धा ण भावसवणत्तणं पत्ता ॥67॥
णग्गो पावइ दुक्खं णग्गो संसारसायरे भमइ
णग्गो ण लहइ बोहिं जिणभावणवज्जिओ सुइरं ॥68॥
णग्गो ण लहइ बोहिं जिणभावणवज्जिओ सुइरं ॥68॥
अयसाण भावयेण य किं ते णग्गेम पावमलिणेण
पेसुण्णाहासमच्छरमायाबहुलेण सवणेण ॥69॥
पेसुण्णाहासमच्छरमायाबहुलेण सवणेण ॥69॥
पयडहिं जिणवरलिंगं अब्भिंतरभावदोसपरिसुद्धो
भावमलेण य जीवो बाहिरसंगम्मि मयलियइ ॥70॥
भावमलेण य जीवो बाहिरसंगम्मि मयलियइ ॥70॥
धम्मम्मि णिप्पवासो दोसावासो य उच्छुफुल्लसमो
णिप्फलणिग्गुणयारो णडसवणो णग्गरूवेण ॥71॥
णिप्फलणिग्गुणयारो णडसवणो णग्गरूवेण ॥71॥
जे रायसंगजुत्ता जिणभावणरहियदव्वणिग्गंथा
ण लहंति ते समाहिं बोहिं जिणसासणे विमले ॥72॥
ण लहंति ते समाहिं बोहिं जिणसासणे विमले ॥72॥
भावेण होइ णग्गो मिच्छत्ताई य दोस चइऊणं
पच्छा दव्वेण मुणी पयडदि लिंगं जिणाणाए ॥73॥
पच्छा दव्वेण मुणी पयडदि लिंगं जिणाणाए ॥73॥
भावो वि दिव्वसिवसुक्खभायणो भाववज्जिओ सवणो
कम्ममलमलिणचित्तो तिरियालयभायणो पावो ॥74॥
कम्ममलमलिणचित्तो तिरियालयभायणो पावो ॥74॥
खयरामरमणुयकरंजलिमालाहिं च संथुया विऊला
चक्कहररायलच्छी लब्भइ बोही सुभावेण ॥75॥
चक्कहररायलच्छी लब्भइ बोही सुभावेण ॥75॥
भावं तिविहपयारं सुहासुहं सुद्धमेव णायव्वं
असुहं च अट्टरउद्दं सुह धम्मं जिणवरिं देहिं ॥76॥
असुहं च अट्टरउद्दं सुह धम्मं जिणवरिं देहिं ॥76॥
सुद्धं सुद्धसहावं अप्पा अप्पम्मि तं च णायव्वं
इदि जिणवरेहिं भणियं जं सेयं तं समायरह ॥77॥
इदि जिणवरेहिं भणियं जं सेयं तं समायरह ॥77॥
पयलियमाणकसाओ पयलियमिच्छत्तमोहसमचित्तो
पावइ तिहुवणसारं बोहि जिणसासणे जीवो ॥78॥
पावइ तिहुवणसारं बोहि जिणसासणे जीवो ॥78॥
विसयविरत्तो समणो छद्दसवरकारणाइं भाऊण
तित्थयरणामकम्मं बंधइ अइरेण कालेण ॥79॥
तित्थयरणामकम्मं बंधइ अइरेण कालेण ॥79॥
बारसविहतवयरणं तेरसकिरियाउ भाव तिविहेण
धरहि मणमत्तदुरियं णाणंकुसएण मुणिपवर ॥80॥
धरहि मणमत्तदुरियं णाणंकुसएण मुणिपवर ॥80॥
पंचविहचेलचायं खिदिसयणं दुविहसंजमं भिक्खू
भावं भावियपुव्वं जिणलिंगं णिम्मलं सुद्धं ॥81॥
भावं भावियपुव्वं जिणलिंगं णिम्मलं सुद्धं ॥81॥
जह रयणाणं पवरं वज्जं जह तरुगणाण गोसीरं
तह धम्माणं पवरं जिणधम्मं भाविभवमहणं ॥82॥
तह धम्माणं पवरं जिणधम्मं भाविभवमहणं ॥82॥
पूयादिसु वयसहियं पुण्णं हि जिणेहिं सासणे भणियं
मोहक्खोहविहीणो परिणामो अप्पणो धम्मो ॥83॥
मोहक्खोहविहीणो परिणामो अप्पणो धम्मो ॥83॥
सद्दहदि य पत्तेदि य रोचेदि य तह पुणो वि फासेदि
पुण्णं भोयणिमित्तं ण हु सो कम्मक्खयणिमित्तं ॥84॥
पुण्णं भोयणिमित्तं ण हु सो कम्मक्खयणिमित्तं ॥84॥
अप्पा अप्पम्मि रओ रायादिसु सयलदोसपरिचत्तो
संसारतरणहेदू धम्मो त्ति जिणेहिं णिद्दिट्ठं ॥85॥
संसारतरणहेदू धम्मो त्ति जिणेहिं णिद्दिट्ठं ॥85॥
अह पुण अप्पा णिच्छदि पुण्णाइं करेदि णिरवसेसाइं
तह वि ण पावदि सिद्धिं संसारत्थो पुणो भणिदो ॥86॥
तह वि ण पावदि सिद्धिं संसारत्थो पुणो भणिदो ॥86॥
एएण कारणेण य तं अप्पा सद्दहेह तिविहेण
जेण य लहेह मोक्खं तं जाणिज्जह पयत्तेण ॥87॥
जेण य लहेह मोक्खं तं जाणिज्जह पयत्तेण ॥87॥
मच्छो वि सालिसित्थो असुद्धभावो गओ महाणरयं
इय णाउं अप्पाणं भावह जिणभावणं णिच्चं ॥88॥
इय णाउं अप्पाणं भावह जिणभावणं णिच्चं ॥88॥
बाहिसंगच्चाओ गिरिसरिदरिकंदराइ आवासो
सयलो णाणज्झयणो णिरत्थओ भावरहियाणं ॥89॥
सयलो णाणज्झयणो णिरत्थओ भावरहियाणं ॥89॥
भंजसु इन्दियसेणं भंजसु मणमक्कडं पयत्तेण
मा जणरंजणकरणं बाहिरवयवेस तं कुणसु ॥90॥
मा जणरंजणकरणं बाहिरवयवेस तं कुणसु ॥90॥
णवणोकसायवग्गं मिच्छत्तं चयसु भावसुद्धीए
चेइयपवयणगुरुणं करेहि भंत्ते जिणाणाए ॥91॥
चेइयपवयणगुरुणं करेहि भंत्ते जिणाणाए ॥91॥
तित्थयरभासियत्थं गणहरदेवेहिं गंथियं सम्मं
भावहि अणुदिणु अतुलं विसुद्धभावेण सुयणाणं ॥92॥
भावहि अणुदिणु अतुलं विसुद्धभावेण सुयणाणं ॥92॥
पीऊण णाणसलिलं णिम्महतिसडाहसोसउम्मुक्का
होंति सिवालयवासी तिहुवणचूडामणी सिद्धा ॥93॥
होंति सिवालयवासी तिहुवणचूडामणी सिद्धा ॥93॥
दस दस दो सुपरीसह सहहि मुणी सयलकाल काएण
सुत्तेण अप्पमत्तो संजमघादं पमोत्तूण ॥94॥
सुत्तेण अप्पमत्तो संजमघादं पमोत्तूण ॥94॥
जह पत्थरो ण भिज्जइ परिट्ठिओ दीहकालमुदएण
तह साहू वि म भिज्जइ उवसग्गपरीसहेहिंतो ॥95॥
तह साहू वि म भिज्जइ उवसग्गपरीसहेहिंतो ॥95॥
भावहि अणुवेक्खाओ अवरे पणवीसभावणा भावि
भावरहिएण किं पुण बाहिरलिंगेण कायव्वं ॥96॥
भावरहिएण किं पुण बाहिरलिंगेण कायव्वं ॥96॥
सव्वविरओ वि भावहि णव य पयत्थाइं सत्त तच्चाइं
जीवसमासाइं मुणी चउदसगुणठाणणामाइं ॥97॥
जीवसमासाइं मुणी चउदसगुणठाणणामाइं ॥97॥
णवविहबंभं पयडहि अब्बंभं दसविहं पमोत्तूण
मेहुणसण्णासत्तो भमिओ सि भवण्णवे भीमे ॥98॥
मेहुणसण्णासत्तो भमिओ सि भवण्णवे भीमे ॥98॥
भावसहिदो य मुणिणो पावइ आराहणाचउक्कं च
भावरहिदो य मुणिवर भमइ चिरं दीहसंसारे ॥99॥
भावरहिदो य मुणिवर भमइ चिरं दीहसंसारे ॥99॥
पावंति भावसवणा कल्लाणपरंपराइं सोक्खाइं
दुक्खाइं दव्वसवणा णरतिरियकुदेवजोणीए ॥100॥
दुक्खाइं दव्वसवणा णरतिरियकुदेवजोणीए ॥100॥
छायालदोसदूसियमसणं गसिउं असुद्धभावेण
पत्तो सि महावसणं तिरियगईए अणप्पवसो ॥101॥
पत्तो सि महावसणं तिरियगईए अणप्पवसो ॥101॥
सच्चित्तभत्तपाणं गिद्धी दप्पेणडधी पभूत्तूण
पत्तो सि तिव्वदुक्खं अणाइकालेण तं चिंत ॥102॥
पत्तो सि तिव्वदुक्खं अणाइकालेण तं चिंत ॥102॥
कंदं मूलं बीयं पुप्फं पत्तादि किंचि सच्चित्तं
असिऊण माणगव्वं भमिओ सि अणंतसंसारे ॥103॥
असिऊण माणगव्वं भमिओ सि अणंतसंसारे ॥103॥
विणयं पचपयारं पालहि मणवयणकायजोएण
अविणयणरा सुविहियं तत्तो मुत्तिं न पावंति ॥104॥
अविणयणरा सुविहियं तत्तो मुत्तिं न पावंति ॥104॥
णियसत्तीए महाजस भत्तीराएण णिच्चकालम्मि
तं कुण जिणभत्तिपरं विज्जावच्चं दसवियप्पं ॥105॥
तं कुण जिणभत्तिपरं विज्जावच्चं दसवियप्पं ॥105॥
जं किंचि कयं दोसं मणवयकाएहिं असुहभावेणं
तं गरहि गुरुसयासे गारव मायं च मोत्तूण ॥106॥
तं गरहि गुरुसयासे गारव मायं च मोत्तूण ॥106॥
दुज्जणवयणचडक्कं णिट्ठरकडुयं सहंति सप्पुरिसा
कम्ममलणासणट्ठं भावेण य णिम्ममा सवणा ॥107॥
कम्ममलणासणट्ठं भावेण य णिम्ममा सवणा ॥107॥
पावं खवइ असेस खमाए पडिमंडिओ य मुणपवरो
खेयरअमरणराणं पसंसणीओ धुवं होइ ॥108॥
खेयरअमरणराणं पसंसणीओ धुवं होइ ॥108॥
इय णाऊण खमागुण खमेहि तिविहेण सयल जीवाणं
चिरसंचियकोहसिहिं वरखमसलिलेण सिंचेह ॥109॥
चिरसंचियकोहसिहिं वरखमसलिलेण सिंचेह ॥109॥
दिक्खाकालाईयं भावहि अवियारदंसणविसुद्धो
उत्तमबोहिणिमित्तं असारसाराणि मुणिऊण ॥110॥
उत्तमबोहिणिमित्तं असारसाराणि मुणिऊण ॥110॥
सेवहि चउविहलिंगं अब्भंतरलिंगसुद्धिमावण्णो
बाहिरलिंगमकज्जं होइ फुडं भावरहियाणं ॥111॥
बाहिरलिंगमकज्जं होइ फुडं भावरहियाणं ॥111॥
आहारभयपरिग्गहमेहुणसण्णाहि मोहिओ सि तुमं
भमिओ संसारवणे अणाइकालं अणप्पवसो ॥112॥
भमिओ संसारवणे अणाइकालं अणप्पवसो ॥112॥
बाहिरसयणत्तावणतरुमूलाईणि उत्तरगुणाणि
पालहि भावविशुद्धो पूयालाहं ण ईहंतो ॥113॥
पालहि भावविशुद्धो पूयालाहं ण ईहंतो ॥113॥
भावहि पढमं तच्चं बिदियं तदियं चउत्थ पंचमयं
तियरणसुद्धो अप्पं अणाइणिहणं तिवग्गहरं ॥114॥
तियरणसुद्धो अप्पं अणाइणिहणं तिवग्गहरं ॥114॥
जाव ण भावइ तच्चं जाव ण चिंतेइ चिंतणीयाइं
ताव ण पावइ जीवो जरमरणविवज्जियं ठाणं ॥115॥
ताव ण पावइ जीवो जरमरणविवज्जियं ठाणं ॥115॥
पावं हवइ असेसं पुण्णमसेसं च हवइ परिणामा
परिणामादो बंधो मुक्खो जिणसासणे दिट्ठो ॥116॥
परिणामादो बंधो मुक्खो जिणसासणे दिट्ठो ॥116॥
मिच्छत्त तह कसायासंजमजोगेहिं असुहलेसेहिं
बंधइ असुहं कम्मं जिणवयणपरम्मुहो जीवो ॥117॥
बंधइ असुहं कम्मं जिणवयणपरम्मुहो जीवो ॥117॥
तव्विवरीओ बंधइ सुहकम्मं भावसुद्धिमावण्णो
दुविहपयारं बंधइ संखेवेणेव वज्जरियं ॥118॥
दुविहपयारं बंधइ संखेवेणेव वज्जरियं ॥118॥
णाणावरणादीहिं य अट्ठहिं कम्मेहिं वेढिओ य अहं
डहिऊण इण्हिं पयडमि अणंतणाणाइगुणचित्तां ॥119॥
डहिऊण इण्हिं पयडमि अणंतणाणाइगुणचित्तां ॥119॥
सीलसहस्सट्ठारस चउरासीगुणगणाण लक्खाइं
भावहि अणुदिणु णिहिलं असप्पलावेण किं बहुणा ॥120॥
भावहि अणुदिणु णिहिलं असप्पलावेण किं बहुणा ॥120॥
झायहि धम्मं सुक्कं अट्ट रउद्दं च झाण मुत्तूण
रुद्दट्ट झाइयाइं झमेण जीवेण चिरकालं ॥121॥
रुद्दट्ट झाइयाइं झमेण जीवेण चिरकालं ॥121॥
जे के वि दव्वसवणा इंदियसुहआउला ण छिंदंति
छिंदंति भावसवणा झाणकुढारेहिं भवरुक्खं ॥122॥
छिंदंति भावसवणा झाणकुढारेहिं भवरुक्खं ॥122॥
जह दीवो गब्भहरे मारुयबाहाविवज्जिओ जलइ
तह रायाणिलरहिओ झाणपईवो वि पज्जलइ ॥123॥
तह रायाणिलरहिओ झाणपईवो वि पज्जलइ ॥123॥
झायहि पंच वि गुरवे मंगलचउसरणलोयपरियरिए
णरसुरखेयरमहिए आराहणणायगे वीरे ॥124॥
णरसुरखेयरमहिए आराहणणायगे वीरे ॥124॥
णाणमयविमलसीयलसलिलं पाऊण भविय भावेण
बाहिजरमरणवेयणडाहविमुक्का सिवा होंति ॥125॥
बाहिजरमरणवेयणडाहविमुक्का सिवा होंति ॥125॥
यह बीयम्मि य दड्ढे ण वि रोहइ अंकुरो य महिवीढे
तह कम्मबीयदड्ढे भवंकुरो भावसवणाणं ॥126॥
तह कम्मबीयदड्ढे भवंकुरो भावसवणाणं ॥126॥
भावसवणो वि पावइ सुक्खाइं दुहाइं जव्वसवणो य
इय णाउं गुणदोसे भावेण य संजुदो होह ॥127॥
इय णाउं गुणदोसे भावेण य संजुदो होह ॥127॥
तित्थयरगणहराइं अब्भुदयपरंपराइं सोक्खाइं
पावंति भावसहिया संखेवि जिणेहिं बज्जरियं ॥128॥
पावंति भावसहिया संखेवि जिणेहिं बज्जरियं ॥128॥
ते धण्णा ताण णमो दंसणवरणाणचरणसुद्धाणं
भावसहियाण णिच्चं तिविहेण पणट्ठमायाणं ॥129॥
भावसहियाण णिच्चं तिविहेण पणट्ठमायाणं ॥129॥
इड्ढिमतुलं विउव्विय किण्णरकिंपुरिसअमरखयरेहिं
तेहिं वि ण जाइ मोहं जिणभावणभाविओ धीरो ॥130॥
तेहिं वि ण जाइ मोहं जिणभावणभाविओ धीरो ॥130॥
किं पुण गच्छइ मोहं णरसुरसुक्खाण अप्पसाराणं
जाणंतो पस्संतो चिंतंतो मोक्ख मुणिधवलो ॥131॥
जाणंतो पस्संतो चिंतंतो मोक्ख मुणिधवलो ॥131॥
उत्थरइ जा ण जरओ रोयग्गी जा ण डहइ देहउडिं
इन्दियबलं ण वियलइ ताव तुमं कुणहि अप्पहियं ॥132॥
इन्दियबलं ण वियलइ ताव तुमं कुणहि अप्पहियं ॥132॥
छज्जीव छडायदणं णिच्चं मणवयणकायजोएहिं
कुरु दय परिहर मुणिवर भावि अपुव्वं महासत्तं ॥133॥
कुरु दय परिहर मुणिवर भावि अपुव्वं महासत्तं ॥133॥
दसविहपाणाहारो अणंतभवसायरे भमंतेण
भोयसुहकारणट्ठं कदो य तिविहेण सयलजीवाणं ॥134॥
भोयसुहकारणट्ठं कदो य तिविहेण सयलजीवाणं ॥134॥
पाणिवहेहि महाजस चउरासीलक्खजोणिमज्झम्मि
उप्पजंत मरंतो पत्तो सि णिरंतरं दुक्खं ॥135॥
उप्पजंत मरंतो पत्तो सि णिरंतरं दुक्खं ॥135॥
जीवाणमभयदाणं देहि मुणी पाणिभूयसत्ताणं
कल्लाणसुहणिमित्तं परंपरा तिविहसुद्धीए ॥136॥
कल्लाणसुहणिमित्तं परंपरा तिविहसुद्धीए ॥136॥
असियसय किरियवाई अक्किरियाणं च होइ चुलसीदी
सत्तट्ठी अण्णाणी वेणईया होंति बत्तीसा ॥137॥
सत्तट्ठी अण्णाणी वेणईया होंति बत्तीसा ॥137॥
ण मुयइ पयडि अभव्वो सुट्ठु वि आयण्णिऊण जिणधम्मं
गुडदुद्धं पि पिबंता ण पण्णया णिव्विसा होंति ॥138॥
गुडदुद्धं पि पिबंता ण पण्णया णिव्विसा होंति ॥138॥
मिच्छत्तछण्णदिट्ठी दुद्धीए दुम्मएहिं दोसेहिं
धम्मं जिणपण्णत्तं अभव्यजीवो ण रोचेदि ॥139॥
धम्मं जिणपण्णत्तं अभव्यजीवो ण रोचेदि ॥139॥
कुच्छियधम्मम्मि रओ कुच्छियपासंडिभत्तिसंजुत्तो
कुच्छियतवं कुणंतो कुच्छियगइभायणो होइ ॥140॥
कुच्छियतवं कुणंतो कुच्छियगइभायणो होइ ॥140॥
इय मिच्छत्तावासे कुणयकुसत्थेहिं मोहिओ जीवो
भमिओ अणाइकालं संसारे धीर चिंतेहि ॥141॥
भमिओ अणाइकालं संसारे धीर चिंतेहि ॥141॥
पासंडी तिण्णि सया तिसट्ठि भेया उमग्ग मुत्तूण
रुंभहि मणु जिणमग्गे असप्पलावेण किं बहुणा ॥142॥
रुंभहि मणु जिणमग्गे असप्पलावेण किं बहुणा ॥142॥
जीवविमुक्को सवओ दंसणमुक्को य होइ चलसवओ
सवओ लोयअपुज्जो लोउत्तरयम्मि चलसवओ ॥143॥
सवओ लोयअपुज्जो लोउत्तरयम्मि चलसवओ ॥143॥
जह तारयाण चंदो मयराओ मयउलाण सव्वाणं
अहिओ तह सम्मत्तो रिसिसावयदुविहधम्माणं ॥144॥
अहिओ तह सम्मत्तो रिसिसावयदुविहधम्माणं ॥144॥
जह फणिराओ *सोहइ फणमणिमाणिक्ककिकिरणविप्फुरिओ
तह विमलदंसणधरो +जिणभत्ती पवयणे जीवो ॥145॥
तह विमलदंसणधरो +जिणभत्ती पवयणे जीवो ॥145॥
जह तारायणसहियं ससहरबिंबं खमंडले विमले
भाविय तववयविमलं जिणलिंगं दंसणविसुद्धं ॥146॥
भाविय तववयविमलं जिणलिंगं दंसणविसुद्धं ॥146॥
इय णाउं गुणदोसं दंसणरयणं धरेह भावेण
सारं गुणरयणाणं सोवाणं पढम मोक्खस्स ॥147॥
सारं गुणरयणाणं सोवाणं पढम मोक्खस्स ॥147॥
कत्ता भोइ अमुत्तो सरीरमित्तो अणाइणिहणो य
दंसणणाणुवओगो णिद्दिट्ठो जिणवरिन्देहिं ॥148॥
दंसणणाणुवओगो णिद्दिट्ठो जिणवरिन्देहिं ॥148॥
दंसणणाणावरणं मोहणियं अंतराइयं कम्मं
णिट्ठवइ भवियजीवो सम्मं जिणभावणाजुत्तो ॥149॥
णिट्ठवइ भवियजीवो सम्मं जिणभावणाजुत्तो ॥149॥
बलसोक्खणाणदंसण चत्तारि वि पायडा गुणा होंति
णट्ठे घाइचउक्के लोयालोयं पयासेदि ॥150॥
णट्ठे घाइचउक्के लोयालोयं पयासेदि ॥150॥
णाणी सिव परमेट्ठी सव्वण्हू विण्हु चउमुहो बुद्धो
अप्पो वि य परमप्पो कम्मविमुक्को य होइ फुडं ॥151॥
अप्पो वि य परमप्पो कम्मविमुक्को य होइ फुडं ॥151॥
इय घाइकम्ममुक्को अट्ठारहदोसवज्जिओ सयलो
तिहुवणभवणपदीवो देउ ममं उत्तमं बोहिं ॥152॥
तिहुवणभवणपदीवो देउ ममं उत्तमं बोहिं ॥152॥
जिणवरचरणंबुरुहं णमंति जे परमभत्तिराएण
ते जम्मवेल्लिमूलं खणंति वरभावसत्थेण ॥153॥
ते जम्मवेल्लिमूलं खणंति वरभावसत्थेण ॥153॥
जह सलिलेण ण लिप्पइ कमलिणिपत्तं सहावपयडीए
तह भावेण ण लिप्पइ कसायविसएहिं सप्पुरिसो ॥154॥
तह भावेण ण लिप्पइ कसायविसएहिं सप्पुरिसो ॥154॥
ते च्चिय भणामि हं जे सयलकलासीलसंजमगुणेहिं
बहुदोसाणावासो सुमलिणचित्तो ण सावयसमो सो ॥155॥
बहुदोसाणावासो सुमलिणचित्तो ण सावयसमो सो ॥155॥
ते धीरवीरपुरिसा खमदखग्गेण विप्फुरंतेण
दुज्जयपबलबलुद्धरकसायभड णिज्जिया जेहिं ॥156॥
दुज्जयपबलबलुद्धरकसायभड णिज्जिया जेहिं ॥156॥
धण्णा ते भयवंता दंसणणाणग्गपवरहत्थेहिं
विसयमयरहरपडिया भविया उत्तारिया जेहिं ॥157॥
विसयमयरहरपडिया भविया उत्तारिया जेहिं ॥157॥
मायावेल्लि असेसा मोहमहातरुवरम्मि आरूढा
विसयविसपुप्फफुल्लिय लुणंति मुणि णाणसत्थेहिं ॥158॥
विसयविसपुप्फफुल्लिय लुणंति मुणि णाणसत्थेहिं ॥158॥
मोहमयगारवेहिं य मुक्का ये करुणभावसंजुत्ता
ते सव्वदुरियखंभं हणंति चारित्तखग्गेण ॥159॥
ते सव्वदुरियखंभं हणंति चारित्तखग्गेण ॥159॥
गुणगणमणिमालाए जिणमयगयणे णिसायरमुणिंदो
तारावलिपरियरिओ पुण्णिमइंदुव्व पवणपहे ॥160॥
तारावलिपरियरिओ पुण्णिमइंदुव्व पवणपहे ॥160॥
चक्कहररामकेसवसुखरजिणगणहराइसोक्खाइं
चारणमुणिरिद्धीओ विसुद्धभावा णरा पत्ता ॥161॥
चारणमुणिरिद्धीओ विसुद्धभावा णरा पत्ता ॥161॥
सिवमजरामरलिंगमणोवममुत्तमं परमविमलमतुलं
पत्ता वरसिद्धिसुहं जिणभावणभाविया–जीवा ॥162॥
पत्ता वरसिद्धिसुहं जिणभावणभाविया–जीवा ॥162॥
ते मे तिहुवणमहिमा सिद्धा सुद्धा णिरंजणा णिच्चा
दिंतु वरभावसुद्धिं दंसण णाणे चरित्ते य ॥163॥
दिंतु वरभावसुद्धिं दंसण णाणे चरित्ते य ॥163॥
किं जंपिएण बहुणा अत्थो धम्मो यकाममोक्खो य
अण्णे वि य वावारा भावम्मि परिट्ठिया सव्वे ॥164॥
अण्णे वि य वावारा भावम्मि परिट्ठिया सव्वे ॥164॥
इय भावपाहुडमिणं सव्वंबुद्धेहि देसियं सम्मं
जो पढइ सुणइ भावइ सो पावइ अविचलं ठाणं ॥165॥
जो पढइ सुणइ भावइ सो पावइ अविचलं ठाणं ॥165॥
मोक्ष-पाहुड
णाणमयं अप्पाणं उवलद्धं जेण झडियकम्मेण
चइऊण य परदव्वं णमो णमो तस्स देवस्स ॥1॥
चइऊण य परदव्वं णमो णमो तस्स देवस्स ॥1॥
णमिऊण य तं देवं अणंतवरणाणदंसणं सुद्धं
वोच्छं परमप्पाणं परमपयं परमजोईणं ॥2॥
वोच्छं परमप्पाणं परमपयं परमजोईणं ॥2॥
जं जाणिऊण जोई जोअत्थो जोइऊण अणवरयं
अव्वाबाहमणंतं अणोवमं लहइ णिव्वाणं ॥3॥
अव्वाबाहमणंतं अणोवमं लहइ णिव्वाणं ॥3॥
तिपयारो सो अप्पा परमंतरबाहिरो हु देहीणं
तत्थ परो झाइज्जइ अंतोवाएण चयहि बहिरप्पा ॥4॥
तत्थ परो झाइज्जइ अंतोवाएण चयहि बहिरप्पा ॥4॥
अक्खाणि बाहिरप्पा अंतरअप्पा हु अप्पसंकप्पो
कम्मकलंकविमुक्को परमप्पा भण्णए देवो ॥5॥
कम्मकलंकविमुक्को परमप्पा भण्णए देवो ॥5॥
मलरहिओ कलचत्तो अणिंदिओ केवलो विसुद्धप्पा
परमेट्ठी परमजिणो सिवंकरो सासओ सिद्धो ॥6॥
परमेट्ठी परमजिणो सिवंकरो सासओ सिद्धो ॥6॥
आरुहवि अन्तरप्पा बहिरप्पा छंडिऊण तिविहेण
झाइज्जइ परमप्पा उवइट्ठं जिणवरिंदेहिं ॥7॥
झाइज्जइ परमप्पा उवइट्ठं जिणवरिंदेहिं ॥7॥
बहिरत्थे फुरियमणो इंदियदारेण णियसरूववचुओ
णियदेहं अप्पाणं अज्झवसदि मूढदिट्ठीओ ॥8॥
णियदेहं अप्पाणं अज्झवसदि मूढदिट्ठीओ ॥8॥
णियदेहसरिच्छं पिच्छिऊण परविग्गहं पयत्तेण
अच्चेयणं पि गहिय झाइज्जइ परमभावेण ॥9॥
अच्चेयणं पि गहिय झाइज्जइ परमभावेण ॥9॥
सपरज्झवसाएणं देहेसु य अविदिदत्थमप्पाणं
सुयदाराईविसए मणुयाणं वड्ढए मोहो ॥10॥
सुयदाराईविसए मणुयाणं वड्ढए मोहो ॥10॥
मिच्छाणाणेसु रओ मिच्छाभावेण भाविओ संतो
मोहोदएण पुणरवि अंगं सं मण्णए मणुओ ॥11॥
मोहोदएण पुणरवि अंगं सं मण्णए मणुओ ॥11॥
जो देहे णिरवेक्खो णिद्दंदो णिम्ममो णिरारंभो
आदासहावे सुरतो जोई सो लहइ णिव्वाणं ॥12॥
आदासहावे सुरतो जोई सो लहइ णिव्वाणं ॥12॥
परदव्वरओ बज्झदि विरओ मुच्चेइ विविहकम्मेहिं
एसो जिणउवदेसो समासदो बंधमुक्खस्स ॥13॥
एसो जिणउवदेसो समासदो बंधमुक्खस्स ॥13॥
सद्दव्वरओ सवणो सम्माइट्ठी हवेइ णियमेण
सम्मत्तपरिणदो उण खवेइ दुट्ठट्ठकम्माइं ॥14॥
सम्मत्तपरिणदो उण खवेइ दुट्ठट्ठकम्माइं ॥14॥
जो पुण परदव्वरओ मिच्छादिट्ठी हवेइ सो साहू
मिच्छत्तपरिणदो पुण बज्झदि दुट्ठट्ठकम्मेहिं ॥15॥
मिच्छत्तपरिणदो पुण बज्झदि दुट्ठट्ठकम्मेहिं ॥15॥
परदव्वादो दुग्गई सद्दव्वादो हु सुग्गई होइ
इय णाऊण सदव्वे कुणह रई विरह इयरम्मि ॥16॥
इय णाऊण सदव्वे कुणह रई विरह इयरम्मि ॥16॥
आदसहावादण्णं सच्चित्ताचित्तमिस्सियं हवदि
तं परदव्वं भणियं अवितत्थं सव्वदरिसीहिं ॥17॥
तं परदव्वं भणियं अवितत्थं सव्वदरिसीहिं ॥17॥
दुट्ठट्ठकम्मरहियं अणोवमं णाणविग्गहं णिच्चं
सुद्धं जिणेहिं कहियं अप्पाणां हवदि सद्दव्वं ॥18॥
सुद्धं जिणेहिं कहियं अप्पाणां हवदि सद्दव्वं ॥18॥
जे झायंति सदव्वं परदव्वपरम्मुहा दु सुचरिता
जे जिणवराण मग्गे अणुलग्गा लहहिं णिव्वाणं ॥19॥
जे जिणवराण मग्गे अणुलग्गा लहहिं णिव्वाणं ॥19॥
जिणवरमएण जोई झाणे झाएइ सुद्धमप्पाणं
जेण लहइ णिव्वाणं ण लहइ किं तेण सुरलोयं ॥20॥
जेण लहइ णिव्वाणं ण लहइ किं तेण सुरलोयं ॥20॥
जो जाइ जोयणसयं दियहेणेक्केण लेवि गुरुभारं
सो किं कोसद्धं पि हु ण सक्कए जाउ भुवणयले ॥21॥
सो किं कोसद्धं पि हु ण सक्कए जाउ भुवणयले ॥21॥
जो कोडिए ण जिप्पइ सुहडो संगामएहिं सव्वेहिं
सो किं जिप्पइ इक्किं णरेण संगामए सुहडो ॥22॥
सो किं जिप्पइ इक्किं णरेण संगामए सुहडो ॥22॥
सग्गं तवेण सव्वो वि पावए तहिं वि ज्ञाणजोएण
जो पावइ सो पावइ परलोए सासयं सोक्खं ॥23॥
जो पावइ सो पावइ परलोए सासयं सोक्खं ॥23॥
अइसोहणजोएणं सुद्धं हेमं हवेइ जह तह य
कालाईलद्धीए अप्पा परमप्पओ हवदि ॥24॥
कालाईलद्धीए अप्पा परमप्पओ हवदि ॥24॥
वर वयतवेहि सग्गो मा दुक्खं होउ णिरइ इयरेहिं
छायातवट्ठियाणं पडिवालंताण गुरुभेयं ॥25॥
छायातवट्ठियाणं पडिवालंताण गुरुभेयं ॥25॥
जो इच्छइ णिस्सरिदुं संसारमहण्णवाउ रुद्दाओ
कम्मिंधणाण डहणं सो झायइ अप्पयं सुद्धं ॥26॥
कम्मिंधणाण डहणं सो झायइ अप्पयं सुद्धं ॥26॥
सव्वे कसाय मोत्तुं गारवमयरायदोसवामोहं
लोयववहारविरदो अप्पा झाएह झाणत्थो ॥27॥
लोयववहारविरदो अप्पा झाएह झाणत्थो ॥27॥
मिच्छत्तं अण्णाणं पावं पुण्णं चएवि तिविहेण
मोणव्वएण जोई जोयत्थो जोयए अप्पा ॥28॥
मोणव्वएण जोई जोयत्थो जोयए अप्पा ॥28॥
जं मया दिस्सदे रूवं तं ण जाणादि सव्वहा
जाणगं दिस्सदे णेव तम्हा जंपेमि केण हं ॥29॥
जाणगं दिस्सदे णेव तम्हा जंपेमि केण हं ॥29॥
सव्वासवणिरोहेण कम्मं खवदि संचिदं
जोयत्थो जाणए जोई जिणदेवेण भासियं ॥30॥
जोयत्थो जाणए जोई जिणदेवेण भासियं ॥30॥
जो सुत्तो ववहारे सो जोई जग्गए सकज्जम्मि
जो जग्गदि ववहारे सो सुत्तो अप्पणो कज्जे ॥31॥
इस जाणिऊण जोई ववहारं चयइ सव्वहा सव्वं
झायइ परमप्पाणं जह भणियं जिणवरिंदेहिं ॥32॥
जो जग्गदि ववहारे सो सुत्तो अप्पणो कज्जे ॥31॥
इस जाणिऊण जोई ववहारं चयइ सव्वहा सव्वं
झायइ परमप्पाणं जह भणियं जिणवरिंदेहिं ॥32॥
पंचमहव्वयजुत्तो पंचसु समिदीसु तीसु गुत्तीसु
रयणत्तयसंजुत्तो झाणज्झयणं सया कुणह ॥33॥
रयणत्तयसंजुत्तो झाणज्झयणं सया कुणह ॥33॥
रयणत्तयमाराहं जीवो आराहओ मुणेयव्वो
आराहणाविहाणं तस्स फलं केवलं णाणं ॥34॥
आराहणाविहाणं तस्स फलं केवलं णाणं ॥34॥
सिद्धो सुद्धो आदा सव्वण्हू सव्वलोयदरिसी य
सो जिणवरेहिं भणिओ जाण तुमं केवलं णाणं ॥35॥
सो जिणवरेहिं भणिओ जाण तुमं केवलं णाणं ॥35॥
रयणत्तयं पि जोई आराहइ जो हु जिणवरमएण
सो झायदि अप्पाणं परिहरइ परं ण संदेहो ॥36॥
सो झायदि अप्पाणं परिहरइ परं ण संदेहो ॥36॥
जं जाणइ तं णाणं जं पिच्छइ तं च दसणं णेयं
तं चारित्तं भणियं परिहारो पुण्णपावाणं ॥37॥
तच्चरुई सम्मत्तं तच्चग्गहणं च हवइ सण्णाणं
चारित्तं परिहारो परूवियं जिणवरिंदेहिं ॥38॥
तं चारित्तं भणियं परिहारो पुण्णपावाणं ॥37॥
तच्चरुई सम्मत्तं तच्चग्गहणं च हवइ सण्णाणं
चारित्तं परिहारो परूवियं जिणवरिंदेहिं ॥38॥
दंसणसुद्धो सुद्धो दंसणसुद्धो, लहेइ णिव्वाणं
दंसणविहीणपुरिसो ण लहइ तं इच्छियं लाहं ॥39॥
इय उवएसं सारं जरमरणहरं खु मण्णए जं तु
तं सम्मत्तं भणियं सवणाणं सावयाणं पि ॥40॥
दंसणविहीणपुरिसो ण लहइ तं इच्छियं लाहं ॥39॥
इय उवएसं सारं जरमरणहरं खु मण्णए जं तु
तं सम्मत्तं भणियं सवणाणं सावयाणं पि ॥40॥
जीवाजीवविहत्ती जोई जाणेइ जिणवरमएण
तं सण्णाणं भणियं अवियत्थं सव्वदरसीहिं ॥41॥
तं सण्णाणं भणियं अवियत्थं सव्वदरसीहिं ॥41॥
जं जाणिऊण जोई परिहारं कुणइ पुण्णपावाणं
तं चारित्तं भणियं अवियप्पं कम्मरहिएहिं ॥42॥
तं चारित्तं भणियं अवियप्पं कम्मरहिएहिं ॥42॥
जो रयणत्तयजुत्तो कुणइ तवं संजदो ससत्तीए
सो पावइ परमपयं झायंतो अप्पयं सुद्धं ॥43॥
सो पावइ परमपयं झायंतो अप्पयं सुद्धं ॥43॥
तिहि तिण्णि धरवि णिच्चं तियरहिओ तह तिएण परियरिओ
दोदोसविप्पमुक्को परमप्पा झायए जोई ॥44॥
दोदोसविप्पमुक्को परमप्पा झायए जोई ॥44॥
विसयकसाएहि जुदो रुद्दो परमप्पभावरहियमणो
सो ण लहइ सिद्धिसुहं जिणमुद्दपरम्मुहो जीवो ॥46॥
सो ण लहइ सिद्धिसुहं जिणमुद्दपरम्मुहो जीवो ॥46॥
जिणमुद्दं सिद्धिसुहं हवेइ णियमेण जिणवरुद्दिट्ठं
सिविणे वि ण रुच्चइ पुण जीवा अच्छंति भवगहणे ॥47॥
सिविणे वि ण रुच्चइ पुण जीवा अच्छंति भवगहणे ॥47॥
परमप्पय झायंतो जोई मुच्चेइ मलदलोहेण
णादियदि णवं कम्मं णिद्दिट्ठं जिणवरिंदेहिं ॥48॥
णादियदि णवं कम्मं णिद्दिट्ठं जिणवरिंदेहिं ॥48॥
होऊण दिढचरित्तो दिढसम्मत्तेण भावियमईओ
झायंतो अप्पाणं परमपयं पावए जोई ॥49॥
झायंतो अप्पाणं परमपयं पावए जोई ॥49॥
चरणं हवइ सधम्मो धम्मो सो हवइ अप्पसमभावो
सो रागरोसरहिओ जीवस्स अणण्णपरिणामो ॥50॥
सो रागरोसरहिओ जीवस्स अणण्णपरिणामो ॥50॥
जह फलिहमणि विसुद्धो परदव्वजुदो हवेइ अण्णं सो
तह रागादिविजुत्तो जीवो हवदि हु अणण्णविहो ॥51॥
तह रागादिविजुत्तो जीवो हवदि हु अणण्णविहो ॥51॥
देवगुरुम्मि य भत्तो साहम्मियसंजदेसु अणुरत्तो
सम्मत्तमुव्वहंतो झाणरओ होदि जोई सो ॥52॥
सम्मत्तमुव्वहंतो झाणरओ होदि जोई सो ॥52॥
उग्गतवेणण्णाणी जं कम्मं खवदि भवहि बहुएहिं
तं णाणी तिहि गुत्तो खवेइ अंतोमुहुत्तेण ॥53॥
तं णाणी तिहि गुत्तो खवेइ अंतोमुहुत्तेण ॥53॥
सुहजोएण सुभावं परदव्वे कुणइ रागदो साहू
सो तेण दु अण्णाणी णाणी एत्तो दु विवरीओ ॥54॥
सो तेण दु अण्णाणी णाणी एत्तो दु विवरीओ ॥54॥
आसवहेदू य तहा भावं मोक्खस्स कारणं हवदि
सो तेण दु अण्णाणी आदसहावा दु विवरीदु ॥55॥
सो तेण दु अण्णाणी आदसहावा दु विवरीदु ॥55॥
जो कम्मजादमइओ सहावणाणस्स खंडदूसयरो
सो तेण दु अण्णाणी जिणसासणदूसगो भणिदो ॥56॥
सो तेण दु अण्णाणी जिणसासणदूसगो भणिदो ॥56॥
णाणं चरित्तहीणं दंसणहीणं तवेहिं संजुत्तं
अण्णेसु भावरहियं लिंगग्गहणेण किं सोक्खं ॥57॥
अण्णेसु भावरहियं लिंगग्गहणेण किं सोक्खं ॥57॥
अच्चेयणं पि चेदा जो मण्णइ सो हवेइ अण्णाणी
सो पुण णाणी भणिओ जो मण्णइ चेयणे चेदा ॥58॥
सो पुण णाणी भणिओ जो मण्णइ चेयणे चेदा ॥58॥
तवरहियं जं णाणं णाणविजुत्तो तवो वि अकयत्थो
तम्हा णाणतवेणं संजुत्तो लहइ णिव्वाणं ॥59॥
धुवसिद्धी तित्थयरो चउणाणजुदो करेइ तवयरणं
णाऊण धुवं कुज्जा तवयरणं णाणजुत्तो वि ॥60॥
तम्हा णाणतवेणं संजुत्तो लहइ णिव्वाणं ॥59॥
धुवसिद्धी तित्थयरो चउणाणजुदो करेइ तवयरणं
णाऊण धुवं कुज्जा तवयरणं णाणजुत्तो वि ॥60॥
बाहिरलिंगेण जुदो अब्भंतरलिंगरहियपरियम्मो
सो सगचरित्तभट्टो मोक्खपहविणासगो साहू ॥61॥
सो सगचरित्तभट्टो मोक्खपहविणासगो साहू ॥61॥
सुहेण भाविदं णाणं दुहे जादे विणस्सदि
तम्हा जहाबलं जोई अप्पा दुक्खेहि भावए ॥62॥
तम्हा जहाबलं जोई अप्पा दुक्खेहि भावए ॥62॥
आहारासणणिद्दाजयं च काऊण जिणवरमएण
झायव्वो णियअप्पा णाऊणं गुरुपसाएण ॥63॥
झायव्वो णियअप्पा णाऊणं गुरुपसाएण ॥63॥
अप्पा चरित्तवंतो दंसणणाणेण संजुदो अप्पा
सो झायव्वो णिच्चं णाऊणं गुरुपसाएण ॥64॥
सो झायव्वो णिच्चं णाऊणं गुरुपसाएण ॥64॥
दुक्खे णज्जइ अप्पा अप्पा णाऊण भावणा दुक्खं
भावियसहावपुरिसो विसयेसु विरज्जए दुक्खं ॥65॥
भावियसहावपुरिसो विसयेसु विरज्जए दुक्खं ॥65॥
ताम ण णज्जइ अप्पा विसएसु णरो पवट्टए जाम
विसए विरत्तचित्तो जोई जाणेइ अप्पाणं ॥66॥
विसए विरत्तचित्तो जोई जाणेइ अप्पाणं ॥66॥
अप्पा जाऊण णरा केई सब्भावभावपब्भट्ठा
हिंडंति चाउरंगं विसएसु विमोहिया मूढा ॥67॥
हिंडंति चाउरंगं विसएसु विमोहिया मूढा ॥67॥
जे पुण विसयविरत्ता अप्पा णाऊण भावणासहिया
छंडंति चाउरंगं तवगुणजुत्ता ण संदेहो ॥68॥
छंडंति चाउरंगं तवगुणजुत्ता ण संदेहो ॥68॥
परमाणुपमाणं वा परदव्वे रदि हवेदि मोहादो
सो मूढो अण्णाणी आदसहावस्स विवरीओ ॥69॥
सो मूढो अण्णाणी आदसहावस्स विवरीओ ॥69॥
अप्पा झायंताणं दंसणसुद्धीण दिढचरित्ताणं
होदि ध्रुवं णिव्वाणं विसएसु विरत्तचित्ताणं ॥70॥
होदि ध्रुवं णिव्वाणं विसएसु विरत्तचित्ताणं ॥70॥
जेण रागो परे दव्वे संसारस्स हि कारणं
तेणावि जोइणो णिच्चं कुज्जा अप्पे सभावणं ॥71॥
तेणावि जोइणो णिच्चं कुज्जा अप्पे सभावणं ॥71॥
णिंदाए य पसंसाए दुक्खे य सुहएसु य
सत्तूणं चेव बंधूणं चारित्तं समभावदो ॥72॥
सत्तूणं चेव बंधूणं चारित्तं समभावदो ॥72॥
चरियावरिया वदसमिदिवज्जिया सुद्धभावपब्भट्ठा
केई जंपंति णरा ण हु कालो झाणजोयस्स ॥73॥
सम्मत्तणाणरहिओ अभव्वजीवो हु मोक्खपरिमुक्को
संसारसुहे सुरदो ण हु कालो भणइ झाणस्स ॥74॥
केई जंपंति णरा ण हु कालो झाणजोयस्स ॥73॥
सम्मत्तणाणरहिओ अभव्वजीवो हु मोक्खपरिमुक्को
संसारसुहे सुरदो ण हु कालो भणइ झाणस्स ॥74॥
पंचसु महव्वदेसु य पंचसु समिदीसु तीसु गुत्तीसु
जो मूढो अण्णाणी ण हु कालो भणइ झाणस्स ॥75॥
जो मूढो अण्णाणी ण हु कालो भणइ झाणस्स ॥75॥
भरहे दुस्समकाले धम्मज्झाणं हवेइ साहुस्स
तं अप्पसहावठिदे ण हु मण्णइ सो वि अण्णाणी ॥76॥
तं अप्पसहावठिदे ण हु मण्णइ सो वि अण्णाणी ॥76॥
अज्ज वि तिरयणसुद्धा अप्पा झाएवि लहहिं इंदत्तं
लोयंतियदेवत्तं तत्थ चुआ णिव्वुदिं जंति ॥77॥
लोयंतियदेवत्तं तत्थ चुआ णिव्वुदिं जंति ॥77॥
जे पावमोहियमई लिंग घेत्तूण जिणवरिंदाणं
पावं कुणंति पावा ते चत्ता मोक्खमग्गम्मि ॥78॥
पावं कुणंति पावा ते चत्ता मोक्खमग्गम्मि ॥78॥
जे पंचचेलसत्ता गंथग्गाही य जायणासीला
आधाकम्मम्मि रया ते चत्ता मोक्खमग्गम्मि ॥79॥
आधाकम्मम्मि रया ते चत्ता मोक्खमग्गम्मि ॥79॥
णिग्गंथमोहमुक्का बावीसपरीसहा जियकसाया
पावारंभविमुक्का ते गहिया मोक्खमग्गम्मि ॥80॥
पावारंभविमुक्का ते गहिया मोक्खमग्गम्मि ॥80॥
उद्धद्धमज्झलोये केई मज्झं ण अहयमेगागी
इय भावणाए जोई पावंति हु सासयं सोक्खं ॥81॥
इय भावणाए जोई पावंति हु सासयं सोक्खं ॥81॥
देवगुरूणं भत्ता णिव्वेयपरंपरा विचिंतिंता
झाणरया सुचरित्ता ते गहिया मोक्खमग्गम्मि ॥82॥
झाणरया सुचरित्ता ते गहिया मोक्खमग्गम्मि ॥82॥
णिच्छयणयस्स एवं अप्पा अप्पम्मि अप्पणे सुरदो
सो होदि हु सुचरित्तो जोई सो लहइ णिव्वाणं ॥83॥
सो होदि हु सुचरित्तो जोई सो लहइ णिव्वाणं ॥83॥
पुरिसायारो अप्पा जोई वरणाणदंसणसमग्गो
जो झायदि सो जोई पावहरो हवदि णिद्दंदो ॥84॥
जो झायदि सो जोई पावहरो हवदि णिद्दंदो ॥84॥
एवं जिणेहि कहियं सवणाणं सावयाण पुण सुणसु
संसारविणासयरं सिद्धियरं कारणं परमं ॥85॥
संसारविणासयरं सिद्धियरं कारणं परमं ॥85॥
गहिऊण य सम्मत्तं सुणिम्मलं सुरगिरीव णिक्कंपं
तं झाणे झाइज्जइ सावय दुक्खक्खयट्ठाए ॥86॥
तं झाणे झाइज्जइ सावय दुक्खक्खयट्ठाए ॥86॥
सम्मत्तं जो झायइ सम्माइट्ठी हवेइ सो जीवो
सम्मत्तपरिणदो उण खवेइ दुट्ठट्ठकम्माणि ॥87॥
किं बहुणा भणिएणं जे सिद्धा णरवरा गए काले
सिज्झिहहि जे वि भविया तं जाणह सम्ममाहप्पं ॥88॥
सम्मत्तपरिणदो उण खवेइ दुट्ठट्ठकम्माणि ॥87॥
किं बहुणा भणिएणं जे सिद्धा णरवरा गए काले
सिज्झिहहि जे वि भविया तं जाणह सम्ममाहप्पं ॥88॥
ते धण्णा सुकयत्था ते सूरा ते वि पडिया मणुया
सम्मत्तं सिद्धियरं सिविणे वि ण मइलियं जेहिं ॥89॥
सम्मत्तं सिद्धियरं सिविणे वि ण मइलियं जेहिं ॥89॥
हिंसारहिए धम्मे अट्ठारहदोसवज्जिए देवे
णिग्गंथे पव्वयणे सद्दहणं होइ सम्मत्तं ॥90॥
णिग्गंथे पव्वयणे सद्दहणं होइ सम्मत्तं ॥90॥
जहजायरूवरूवं सुसंजयं सव्वसंगपरिचत्तं
लिंगं ण परावेक्खं जो मण्णइ तस्स सम्मत्तं ॥91॥
लिंगं ण परावेक्खं जो मण्णइ तस्स सम्मत्तं ॥91॥
कुच्छियदेवं धम्मं कुच्छियलिंगं च बंदए जो दु
लज्जाभयगारवदो मिच्छादिट्ठी हवे सो हु ॥92॥
सपरावेक्खं लिंगं राई देवं असंजयं वंदे
मण्णइ मिच्छादिट्ठी ण हु मण्णइ सुद्धसम्मत्तो ॥93॥
सम्माइट्ठी सावय धम्मं जिणदेवदेसियं कुणदि
विवरीयं कुव्वंतो मिच्छादिट्ठी मुणेयव्वो ॥94॥
लज्जाभयगारवदो मिच्छादिट्ठी हवे सो हु ॥92॥
सपरावेक्खं लिंगं राई देवं असंजयं वंदे
मण्णइ मिच्छादिट्ठी ण हु मण्णइ सुद्धसम्मत्तो ॥93॥
सम्माइट्ठी सावय धम्मं जिणदेवदेसियं कुणदि
विवरीयं कुव्वंतो मिच्छादिट्ठी मुणेयव्वो ॥94॥
मिच्छादिट्ठी जो सो संसारे संसरेइ सुहरहिओ
जम्मजरमरणपउरे दुक्खसहस्साउले जीवो ॥95॥
जम्मजरमरणपउरे दुक्खसहस्साउले जीवो ॥95॥
सम्म गुण मिच्छ दोसो मणेण परिभाविऊण तं कुणसु
जं ते मणस्स रुच्चइ किं बहुणा पलविएणं तु ॥96॥
जं ते मणस्स रुच्चइ किं बहुणा पलविएणं तु ॥96॥
बाहिरसंगविमुक्को ण वि मुक्को मिच्छभाव णिग्गंथो
किं तस्स ठाणमउणं ण वि जाणदि अप्पसमभावं ॥97॥
किं तस्स ठाणमउणं ण वि जाणदि अप्पसमभावं ॥97॥
मूलगुणं छित्तूण य बाहिरकम्मं करेइ जो साहू
सो ण लहइ सिद्धिसुहं जिणलिंगविराहगो णियद ॥98॥
सो ण लहइ सिद्धिसुहं जिणलिंगविराहगो णियद ॥98॥
किं काहिदि बहिकम्मं किं काहिदि बहुविहं च खवणं तु
किं काहिदि आदावं आदसहावस्स विवरीदो ॥99॥
जदि पढदि बहु सुदाणि य जदि काहिदि बहुविहं च चारित्तं
तं बालसुदं चरणं हवेइ अप्पस्स विवरीदं ॥100॥
किं काहिदि आदावं आदसहावस्स विवरीदो ॥99॥
जदि पढदि बहु सुदाणि य जदि काहिदि बहुविहं च चारित्तं
तं बालसुदं चरणं हवेइ अप्पस्स विवरीदं ॥100॥
वेरग्गपरो साहू परदव्वपरम्मुहो य जो होदि
संसारसुहविरत्तो सगसुद्धसुहेसु अणुरत्तो ॥101॥
गुणगणविहूसियंगो हेयोपादेयणिच्छिदो साहू
झाणज्झयणे सुरदो सो पावइ उत्तमं ठाणं ॥102॥
संसारसुहविरत्तो सगसुद्धसुहेसु अणुरत्तो ॥101॥
गुणगणविहूसियंगो हेयोपादेयणिच्छिदो साहू
झाणज्झयणे सुरदो सो पावइ उत्तमं ठाणं ॥102॥
णविएहिं जं णविज्जइ झाइज्जइ झाइएहिं अणवरयं
थुव्वंतेहिं थुणिज्जइ देहत्थं किं पि तं मुणह ॥103॥
थुव्वंतेहिं थुणिज्जइ देहत्थं किं पि तं मुणह ॥103॥
अरुहा सिद्धायरिया उज्झाया साहु पंच परमेट्ठी
ते वि हु चिट्ठहि आदे तम्हा आदा हु मे सरणं ॥104॥
सम्मत्तं सण्णाणं सच्चारित्तं हि सत्तव चेव
चउरो चिट्ठहि आदे तम्हा आदा हु मे सरणं ॥105॥
ते वि हु चिट्ठहि आदे तम्हा आदा हु मे सरणं ॥104॥
सम्मत्तं सण्णाणं सच्चारित्तं हि सत्तव चेव
चउरो चिट्ठहि आदे तम्हा आदा हु मे सरणं ॥105॥
एवं जिणपण्णत्तं मोक्खस्स य पाहुडं सुभत्तीए
जो पढइ सुणइ भावइ सो पावइ सासयं सोक्खं ॥106॥
जो पढइ सुणइ भावइ सो पावइ सासयं सोक्खं ॥106॥
लिंग-पाहुड
काऊण णमोकारं अरहंताणं तहेव सिद्धाणं
वोच्छामि समणलिंगं पाहुडसत्थं समासेण ॥1॥
वोच्छामि समणलिंगं पाहुडसत्थं समासेण ॥1॥
धम्मेण होइ लिंगं ण लिंगमत्तेण धम्मसंपत्ती
जाणेहि भावधम्मं किं ते लिंगेण कायव्वो ॥2॥
जाणेहि भावधम्मं किं ते लिंगेण कायव्वो ॥2॥
जो पावमोहिदमदी लिंगं घेत्तूण जिणवरिंदाणं
उवहसदि लिंगिभावं लिंगिम्मिय णारदो लिंगी ॥3॥
उवहसदि लिंगिभावं लिंगिम्मिय णारदो लिंगी ॥3॥
णच्चदि गायदि तावं वायं वाएदि लिंगरूवेण
सो पावमोहिदमदी तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥4॥
सो पावमोहिदमदी तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥4॥
सम्मूहदि रक्खेदि य अट्टं झाएदि बहुपयत्तेण
सो पावमोहिदमदी तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥5॥
सो पावमोहिदमदी तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥5॥
कलहं वादं जूवा णिच्चं बहुमाणगव्विओ लिंगी
वच्चदि णरयं पाओ करमाणो लिंगिरूवेण ॥6॥
वच्चदि णरयं पाओ करमाणो लिंगिरूवेण ॥6॥
पाओपहदंभावो सेवदि य अबंभु लिंगिरूवेण
सो पावमोहिदमदी हिंडदि संसारकंतारे ॥7॥
सो पावमोहिदमदी हिंडदि संसारकंतारे ॥7॥
दंसणणाणचरित्ते उवहाणे जइ ण लिंगरूवेण
अट्टं झायदि झाणं अणंतसंसारिओ होदि ॥8॥
अट्टं झायदि झाणं अणंतसंसारिओ होदि ॥8॥
जो जोडेदि विवाहं किसिकम्मवणिज्जजीवघादं च
वच्चदि णरयं पाओ करमाणो लिंगिरूवेण ॥9॥
वच्चदि णरयं पाओ करमाणो लिंगिरूवेण ॥9॥
चोराण लाउराण य जुद्ध विवादं च तिव्वकम्मेहिं
जंतेण दिव्वमाणो गच्छदि लिंगी णरयवासं ॥10॥
जंतेण दिव्वमाणो गच्छदि लिंगी णरयवासं ॥10॥
दंसणणाणचरित्ते तवसंजमणियमणिच्चकम्मम्मि
पीडयदि वट्टमाणो पावदि लिंगी णरयवासं ॥11॥
पीडयदि वट्टमाणो पावदि लिंगी णरयवासं ॥11॥
कंदप्पाइय वट्टइ करमाणो भोयणेसु रसगिद्धिं
मायी लिंगविवाई तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥12॥
मायी लिंगविवाई तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥12॥
धावदि पिंडणिमित्तं कलहं काऊण भुञ्जदे पिंडं
अवरपरूई संतो जिणमग्गि ण होइ सो समणो ॥13॥
अवरपरूई संतो जिणमग्गि ण होइ सो समणो ॥13॥
गिण्हदि अदत्तदाणं परणिंदा वि य परोक्खदूसेहिं
जिणलिंगं धारंतो चोरेण व होइ सो समणो ॥14॥
जिणलिंगं धारंतो चोरेण व होइ सो समणो ॥14॥
उप्पडदि पडदि धावदि पुढवीओ खणदि लिंगरूवेण
इरियावह धारंतो तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥15॥
इरियावह धारंतो तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥15॥
बंधो णिरओ संतो सस्सं खंडेदि तह य वसुहं पि
छिंददि तरुगण बहुसो तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥16॥
छिंददि तरुगण बहुसो तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥16॥
रागं करेदि णिच्चं महिलावग्गं परं च दूसेदि
दंसणणाणविहीणो तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥17॥
दंसणणाणविहीणो तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥17॥
पव्वज्जहीणगहिणं णेहं सीसम्मि वट्टदे बहुसो
आयारविणयहीणो तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥18॥
आयारविणयहीणो तिरिक्खजोणी ण सो समणो ॥18॥
एवं सहिओ मुणिवर संजदमज्झम्मि वट्टदे णिच्चं
बहुलं पि जाणमाणो भावविणट्ठो ण सो समणो ॥19॥
बहुलं पि जाणमाणो भावविणट्ठो ण सो समणो ॥19॥
दंसणणाणचरित्ते महिलावगम्मि देदि वीसट्ठो
पासत्थ वि हु णियट्ठो भावविणट्ठो ण सो समणो ॥20॥
पासत्थ वि हु णियट्ठो भावविणट्ठो ण सो समणो ॥20॥
पुंच्छलिघरि जो भुञ्जइ णिच्चं संथुणदि पोसए पिंडं
पावदि बालसहावं भावविणट्ठो ण सो सवणो ॥21॥
पावदि बालसहावं भावविणट्ठो ण सो सवणो ॥21॥
इय लिंगपाहुडमिणं सव्वंबुद्धेहिं देसियं धम्मं
पालेइ कट्ठसहियं सो गाहदि उत्तमं ठाणं ॥22॥
पालेइ कट्ठसहियं सो गाहदि उत्तमं ठाणं ॥22॥
शील-पाहुड
वीरं विसालणयणं रत्तुप्पलकोमलस्समप्पायं
तिविहेण पणमिऊण सीलगुणाणं णिसामेह ॥1॥
तिविहेण पणमिऊण सीलगुणाणं णिसामेह ॥1॥
सीलस्स य णाणस्स य णत्थि विरोहो बुधेहिं णिद्दिट्ठो
णवरि य सीलेण विणा विसया णाणं विणासंति ॥2॥
णवरि य सीलेण विणा विसया णाणं विणासंति ॥2॥
दुक्खे णज्जदि णाणं णाणं णाऊण भावणा दुक्खं
भावियमई व जीवो विसयेसु विरज्जए दुक्खं ॥3॥
भावियमई व जीवो विसयेसु विरज्जए दुक्खं ॥3॥
ताव ण जाणदि णाणं विसयबलो जाव वट्टए जीवो
विसए विरत्तमेत्ते ण खवेइ पुराइयं कम्मं ॥4॥
विसए विरत्तमेत्ते ण खवेइ पुराइयं कम्मं ॥4॥
णाणं चरित्तहीणं लिंगग्गहणं च दंसणविहूणं
संजमहीणो य तवो जइ चरइ णिरत्थयं सव्व ॥5॥
संजमहीणो य तवो जइ चरइ णिरत्थयं सव्व ॥5॥
णाणं चरित्तसुद्धं लिंगग्गहणं च दंसणविसुद्धं
संजमसहिदो य तवो थोओ वि महाफलो होइ ॥6॥
संजमसहिदो य तवो थोओ वि महाफलो होइ ॥6॥
णाणं णाऊण णरा केई विसयाइभावसंसत्त ।
हिंडंति चादुरगदिं विसएसु विमोहिया मूढ़ा ॥7॥
हिंडंति चादुरगदिं विसएसु विमोहिया मूढ़ा ॥7॥
जे पुण विसयविरत्त णाणं णाऊण भावणासहिदा
छिंदंति चादुरगदिं तवगुणजुत्त ण संदेहो ॥8॥
छिंदंति चादुरगदिं तवगुणजुत्त ण संदेहो ॥8॥
जह कंचणं विसुद्धं धम्मइयं खडियलवणलेवेण
तह जीवो वि विसुद्धं णाणविसलिलेण विमलेण ॥9॥
तह जीवो वि विसुद्धं णाणविसलिलेण विमलेण ॥9॥
णाणस्स णत्थि दोसो कुप्पुरिसाणं वि मंदबुद्धीणं
जे णाणगव्विदा होऊणं विसएसु रज्जंति ॥10॥
जे णाणगव्विदा होऊणं विसएसु रज्जंति ॥10॥
णाणेण दंसणेण य तवेण चरिएण सम्मसहिएण
होहदि परिणिव्वाणं जीवाण चरित्तसुद्धाणं ॥11॥
होहदि परिणिव्वाणं जीवाण चरित्तसुद्धाणं ॥11॥
सीलं रक्खंताणं दंसणसुद्धाण दिढचरित्तणं
अत्थि धुवं णिव्वाणं विसएसु विरत्तचित्तणं ॥12॥
अत्थि धुवं णिव्वाणं विसएसु विरत्तचित्तणं ॥12॥
विसएसु मोहिदाणं कहियं मग्गं पि इट्ठदरिसीणं
उम्मग्गं दरिसीणं णाणं पि णिरत्थयं तेसिं ॥13॥
उम्मग्गं दरिसीणं णाणं पि णिरत्थयं तेसिं ॥13॥
कुमयकुसुदपसंसा जाणंता बहुविहाइं सत्थाइं
शीलवदणाणरहिदा ण हु ते आराधया होंति ॥14॥
शीलवदणाणरहिदा ण हु ते आराधया होंति ॥14॥
रूवसिरिगव्विदाणं जुव्वलावण्णकंतिकलिदाणं
सीलगुणवज्जिदाणं णिरत्थयं माणुसं जम्म ॥15॥
सीलगुणवज्जिदाणं णिरत्थयं माणुसं जम्म ॥15॥
वायरणछंदवइसेसियववहारणायसत्थेसु
वेदेऊण सुदेसु य तेसु सुयं उत्तमं शीलं ॥16॥
वेदेऊण सुदेसु य तेसु सुयं उत्तमं शीलं ॥16॥
सीलगुणमंडिदाणं देवा भवियाण वल्लहा होंति
सुदपारयपउरा णं दुस्सीला अप्पिला लोए ॥17॥
सुदपारयपउरा णं दुस्सीला अप्पिला लोए ॥17॥
सव्वे वि य परिहीणा रूवणिरूवा वि पडिदसुवया वि
सीलं जेसु सुसीलं सुजीविदं माणुसं तेसिं ॥18॥
सीलं जेसु सुसीलं सुजीविदं माणुसं तेसिं ॥18॥
जीवदया दम सच्चं अचोरियं बंभचेरसंतोसे
सम्मद्दंसण णाणं तओ य सीलस्स परिवारो ॥19॥
सम्मद्दंसण णाणं तओ य सीलस्स परिवारो ॥19॥
सीलं तवो विसुद्धं दंसणसुद्धी य णाणसुद्धी य
सीलं विसयाण अरी सीलं मोक्खस्स सोवाणं ॥20॥
सीलं विसयाण अरी सीलं मोक्खस्स सोवाणं ॥20॥
जह विसयलुद्ध विसदो तह थावरजंगमाण घोराणं
सव्वेसिं पि विणासदि विसयविसं दारुणं होई ॥21॥
सव्वेसिं पि विणासदि विसयविसं दारुणं होई ॥21॥
वारि एक्कम्मि य जम्मे मरिज्ज विसवेयणाहदो जीवो
विसयविसपरिहयाणं भमंति संसारकंतारे ॥22॥
विसयविसपरिहयाणं भमंति संसारकंतारे ॥22॥
णरएसु वेयणाओ तिरिक्खए माणवेसु दुक्खाइं
देवेसु वि दोहग्गं लहंति विसयासिया जीवा ॥23॥
देवेसु वि दोहग्गं लहंति विसयासिया जीवा ॥23॥
तुसधम्मंतबलेण य जह दव्वं ण हि णराण गच्छेदि
तवसीलमंत कुसली खवंति विसयं विस व खलं ॥24॥
तवसीलमंत कुसली खवंति विसयं विस व खलं ॥24॥
वट्टेसु य खंडेसु य भद्देसु य विसालेसु अंगेसु
अंगेसु य पप्पेसु य सव्वेसु य उत्तमं सीलं ॥25॥
अंगेसु य पप्पेसु य सव्वेसु य उत्तमं सीलं ॥25॥
पुरिसेण वि सहियाए कुसमयमूढेहि विसयलोलेहिं
संसार भमिदव्वं अरयघरट्टं व भूदेहिं ॥26॥
संसार भमिदव्वं अरयघरट्टं व भूदेहिं ॥26॥
आदेहि कम्मगंठी जा बद्धा विसयरागरंगेहिं
तं छिन्दन्ति कयत्था तवसंजमसीलयगुणेण ॥27॥
तं छिन्दन्ति कयत्था तवसंजमसीलयगुणेण ॥27॥
उदधी व रदणभरिदो तवविणयंसीलदाणरयणाणं
सोहेंतो य ससीलो णिव्वाणमणुत्तरं पत्ते ॥28॥
सोहेंतो य ससीलो णिव्वाणमणुत्तरं पत्ते ॥28॥
सुणहाण गद्दहाण ण गोवसुमहिलाण दीसदे मोक्खो
जे सोधंति चउत्थं पिच्छिज्जंता जणेहि सव्वेहिं ॥29॥
जे सोधंति चउत्थं पिच्छिज्जंता जणेहि सव्वेहिं ॥29॥
जइ विसयलोलएहिं णाणीहि हविज्ज साहिदो मोक्खो
तो सो सच्चइपुत्ते दसपुव्वीओ वि किं गदो णरयं ॥30॥
तो सो सच्चइपुत्ते दसपुव्वीओ वि किं गदो णरयं ॥30॥
जइ णाणेण विसोहो सीलेण विणा बुहेहिं णिद्दिट्ठो
दसपुव्वियस्स भावो य ण किं पुणु णिम्मलो जादो ॥31॥
दसपुव्वियस्स भावो य ण किं पुणु णिम्मलो जादो ॥31॥
जाए विसयविरत्ते सो गमयदि णरयवेयणा पउरा
ता लेहदि अरुहपयं भणियं जिणवड्ढमाणेण ॥32॥
ता लेहदि अरुहपयं भणियं जिणवड्ढमाणेण ॥32॥
एवं बहुप्पयारं जिणेहि पच्चक्खणाणदरसीहिं
सीलेण य मोक्खपयं अक्खातीदं य लोयणाणेहिं ॥33॥
सीलेण य मोक्खपयं अक्खातीदं य लोयणाणेहिं ॥33॥
सम्मत्तणाणदंसणतववीरियपंचयारमप्पाणं
जलणो वि पवणसहिदो डहंति पोरायणं कम्मं ॥34॥
जलणो वि पवणसहिदो डहंति पोरायणं कम्मं ॥34॥
णिद्दड्ढअट्ठकम्मा विसयविरत्त जिदिंदिया धीरा
तवविणयसीलसहिदा सिद्धा सिद्धिं गदिं पत्त ॥35॥
तवविणयसीलसहिदा सिद्धा सिद्धिं गदिं पत्त ॥35॥
लावण्यसीलकुसलो जम्ममहीरुहो जस्स सवणस्स
सो सीलो स महप्पा भमिज्ज गुणवित्थरं भविए ॥36॥
सो सीलो स महप्पा भमिज्ज गुणवित्थरं भविए ॥36॥
णाणं झाणं जोगो दंसणसुद्धीय वीरियायत्तं
सम्मत्तदंसणेण य लहंति जिणसासणे बोहिं ॥37॥
सम्मत्तदंसणेण य लहंति जिणसासणे बोहिं ॥37॥
जिणवयणगहिदसारा विसयविरत्त तवोधणा धीरा
सीलसलिलेण ण्हादा ते सिद्धालयसुहं जंति ॥38॥
सीलसलिलेण ण्हादा ते सिद्धालयसुहं जंति ॥38॥
सव्वगुणखीणकम्मा सुहदुक्खविवज्जिदा मणविसुद्धा
पप्फोडियकम्मरया हवंति आराहणापयडा ॥39॥
पप्फोडियकम्मरया हवंति आराहणापयडा ॥39॥
अरहंते सुहभत्ती सम्मत्तं दंसणेण सुविसुद्धं
सीलं विसयविरागो णाणं पुण केरिसं भणियं ॥40॥
सीलं विसयविरागो णाणं पुण केरिसं भणियं ॥40॥
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